रावण का जन्म अधर्म तो प्रभु श्रीराम का जन्म धर्म की रक्षा के लिए हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
जमालपुर। बहुआर गांव के रविंद्रालय में चल रहे नौ दिवसीय श्रीरामकथा के तीसरे दिन सोनभद्र से पधारे पं. शैलेन्द्र दूबे ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कथावाचिका पं. विजय लक्ष्मी शास्त्री ने भगवान श्रीराम जन्म व चारों भाइयों के गुरु वशिष्ठ की ओर से किए गए नामकरण की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि पाप नाश के लिए ही समय-समय पर भगवान का अवतार होता है। रावण का जन्म अधर्म तो प्रभु श्रीराम का जन्म धर्म की रक्षा के लिए हुआ । कहा कि पहले अधर्म जन्म लेता है तो उसका नाश करने के लिए धर्म का जन्म होता है। कथा का संचालन राजेश दुबे ने किया। इस दौरान कथा आयोजक रविप्रकाश तिवारी, अवधेश सिंह, बबलू सिंह, नरायण सिंह, चिन्तामणी श्रीवास्तव, संजय पांडेय, अवधेश तिवारी आदि उपस्थित रहे।