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कटान रोकने में आफिस, कार्यालय व आफिसरों के आवासीय परिसर को प्राथमिकता

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मिर्जापुर। नदियों के बढ़ने से तटवर्ती इलाकों के कटान का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ से सदर और चुनार तहसील क्षेत्र के अधिकांश हिस्से प्रभावित होते हैं। नगर क्षेत्र में ऑफिस, कार्यालय और अफसरों के आवासीय परिसरों के आसपास कटान रोकने के लिए काम किए जा रहे हैं पर गंगा के तटवर्ती इलाके में बसे गांवों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नगर में प्रमुख स्थानों पर हो रहे कटान से बचाव के लिए 1143 करोड़ की लागत से होने वाले बचाव कार्य का तीन फरवरी 2020 को वीडियो कांफ्रेंसिंग से शिलान्यास कर चुके हैं।
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चील्ह: गंगा में बढ़ते पानी से विकास खंड कोन के तटवर्ती गांव के लोग भयभीत हैं। सेमरा, खुलवा, अनुरुद्धपुर पूरब पट्टी, हरसिंहपुर, मल्लेपुर, जगदीशपुर, मवैया, श्रीपट्टी, जगदीश पुर, मवैया, मलाधरपुर, चील्ह, भटेवरा, दलापट्टी, मदन पट्टी, डिगुरपट्टी, गड़गेड़ी, कमासिन, कोल्हुआ, गहिया, रामपुर, चेकसारी, मुजेहरा सहित गंगा के किनारे के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। बाढ़ के चलते मल्लेपुर और हरसिंहपुर गांव के लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं।
जिगना: छानबे क्षेत्र में गंगा का जल स्तर बढ़ने से हरगढ़, गोगांव, दुगौली, डंगहर, कोठरा मिश्रान, चडैचा, असवा, झिलवर, नीबीगहरवार, आदमपुर, अर्जुनपुर, नौगांव, उंचडीह, बबुरा, चेहरा, काशीसरपत्ती, बजटा, देवरी, मुतलिके, गौरा, खैरा, बसेवरा, मिश्रपुर, नगवासी, घुघुटी परमानपुर, नदिनी, बभनी, जोपा, निफरा, भैदपुर, दत्तीपट्टी, थानीपट्टी, अधवार, अकोढी, चौकठ, देवरी महडौरा, बिरोही, अरगीसरपत्ती, भटेवरा, गैपुरा, गोडसर सरपत्ती, गोडसर पांडेय, रैपुरी और खम्हरिया कला आदि गांव प्रभावित रहते हैं। बाढ़ के समय कटान वाली बस्ती के लोगों को दूसरे जगह आवास बनवाने और कटान रोकने की व्यवस्था की बात अधिकारी और जनप्रतिनिधि करते हैं, लेकिन बाढ़ समाप्त होने के बाद मामला फिर भुला दिया जाता है। कछवा: बरैनी, कछवा डीह, बजहा, केवटाबीर, कमरिया आदि गांव के हजारों एकड़ जमीन में बोई फसल बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। सीखड़: बाढ़ के चलते गंगा के किनारे बसे धनुपुर, पिपराही, बिदापुर, धनैता, फुलहा, प्रेमापुर, रामगढ़, गोरैया, सीखड़, विट्ठलपुर, भुवालपुर, मवैया, कठेरवा, मिसिरपुरा, ईश्वर पट्टी, मेडि़या, बसारतपुर और अदलपुरा आदि गांव प्रभावित हो जाते हैं। इस समय सीखड़ विकास खंड में मिर्च, मक्का, बाजरा, अरहर, भिंडी, तिल्ली, मूंगफली की खेती की गई है। यदि बाढ़ आई तो फसल बर्बाद होने से इनकार नहीं किया जा सकता। क्षेत्र के नागेंद्र त्रिपाठी, नरेंद्र मिश्रा, राकेश पांडेय, प्रमोद सिंह, अनिल सिंह और एसपी पाठक आदि किसानों का कहना है कि समय-समय पर आई बाढ़ से किसानों का नुकसान होता है, लेकिन भरपाई नहीं होती। चुनार: गंगा के जल स्तर में घटाव होने से तटवर्ती इलाके में बसे लोगों की चिंताए कम तो होने लगी हैं, लेकिन चुनार तहसील क्षेत्र के भौरहीं, धौरहरा, समसपुर, टम्मलगंज, बहरामगंज, ऐबकपुर मोहाना, चितरहा, गांगपुर, धरम्मरपुर, बगही, जलालपुर माफी, शिवपुर, रैपुरिया आदि बाढ़ प्रभावित गांव के लोग अभी भी बाढ़ की संभावना से भयभीत नजर आ रहे हैं।
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