घंटाघर का निरीक्षण करती दिल्ली के आर्किटेक्ट की टीम, सोशल मीडिया
आर्किटेक्ट्स की टीम ने निरीक्षण कर लिया जायजा
मिर्जापुर। नगर के ऐतिहासिक घंटाघर को उसके मूल स्वरूप में संरक्षित करने की दिशा में पहल की जा रही है। इसी क्रम में शनिवार को दिल्ली के वास्तुकारों की टीम ने पहुंचकर निरीक्षण किया। नगर पालिका की ओर से इस भवन को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए पुरातत्व विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था।
वास्तुविदों की टीम के निरीक्षण से संग्रहालय निर्माण की प्रक्रिया में प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग के अनुरोध पर यह टीम निरीक्षण के लिए आई है। नगर पालिकाध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी ने कहा कि टीम निरीक्षण कर रही है। वह क्या रिपोर्ट देती है, उसी पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव पांच वर्ष पहले नगर पालिका बोर्ड की बैठक में पारित किया गया था। इसके बाद जिला प्रशासन के माध्यम से प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
प्रस्ताव पारित होने के बाद स्थानांतरित हुआ पालिका कार्यालय
पहले घंटाघर भवन में नगर पालिका परिषद का मुख्य कार्यालय संचालित होता था। यहीं नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी बैठते थे। भवन के विशाल सभागार में पालिका परिषद की बैठकें भी होती थीं। संग्रहालय का प्रस्ताव पारित होने के बाद नगर पालिका कार्यालय को लालडिग्गी स्थानांतरित कर दिया गया।
इनसेट
1891 में 18 हजार की लागत से बना था घंटाघर
बलुआ पत्थर से बने घंटाघर का निर्माण वर्ष 1886 में शुरू हुआ था और 1891 में पूरा हुआ। उस समय इसके निर्माण पर 18 हजार रुपये की लागत आई थी। इसकी चारों दिशाओं में लगाने के लिए चार बड़ी घड़ियां लंदन से मंगाई गई थीं। आज भी इस प्रकार का घंटाघर आसपास के जिलों में नहीं है।