एनजीटी तथा निर्माण इकाई से जुड़े ट्रस्ट के लोगों ने बताया कि पत्थर की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया जा रहा है। आपूर्ति की तय समय सीमा के भीतर गुलाबी पत्थर मिल पाने की संभावना कठिन है, परंतु कोशिश लगातार की जा रही है। गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मांग के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
मजबूती और रंग की वजह से है मांग
कटर प्लांट संचालकों ने बताया कि अहरौरा के गुलाबी पत्थरों की क्वालिटी पिंक सैंड स्टोन के मामले में काफी अच्छी रही है। इसका रंग कभी अपनी सुंदरता नहीं खोता है। पूर्व में किले की दीवार और महलों के निर्माण में उपयोग किया जाता रहा है। नक्काशी के उभार में भी इन पत्थरों का अपना विशेष महत्व है।
इनमें आसानी से नक्काशी की जा सकती है। इन पत्थरों में अत्याधिक भार सहन करने की क्षमता है। भारी दबाव के बावजूद इन पर भार का कोई असर नहीं होता है। कारोबारियों ने राम मंदिर निर्माण के लिए अहरौरा इलाके से गुलाबी पत्थर की आपूर्ति करना गौरव की बात बताया।
फिर भी पत्थरों को लेकर हैं कुछ दिक्कतें
वैज्ञानिक परीक्षण के बाद अहरौरा के गुलाबी पत्थर चयनित हुए तो पहले चरण में दो फीट व्यास वाले चार फीट लंबे पत्थर की आपूर्ति की जानी है। मुलायम पत्थरों की दरकार होगी जिन पर नक्काशी के सहारे विभिन्न शैलियों को जीवंत किया जा सके। पिलर निर्माण में रंगों की समानता का विशेष ख्याल रखने की अनिवार्यता होगी।
पहाड़ियों से निकलने वाले पत्थरों की एकरंगता हो पाना मुश्किल है। अलग-अलग पहाड़ियों से एक रंग का पत्थर निकलना तो दूर की बात है एक ही पहाड़ी से एक ही रंग का पत्थर निकलना भी कठिन है परंतु रंगों की समानता तथा परीक्षण का विशेष ख्याल रखे जाने की अनिवार्यता रहेगी।