जिला महिला चिकित्सालय के वार्ड में बेड पर चादर नहीं बिछी है।
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जिला महिला चिकित्सालय में दुर्व्यवस्था चरम पर है। नार्मल डिलेवरी हो या फिर आपरेशन से, चिकित्सालय में आने वाली हर महिला मरीजों से सुविधा शुल्क लिया जा रहा है। इतना ही नहीं पट्टी बदलने से लेकर डिस्चार्ज होने पर भी पैसे वसूले जा रहे हैं।
वहीं चिकित्सालय में तैनात चिकित्सक और अन्य कर्मचारी मनमाने तरीके से ड्यूटी कर रहे हैं। वर्षों से बंद अल्ट्रासाउंड एक्स-रे भी अभी तक चालू नहीं हो पाया है।
जिला महिला अस्पताल में दूर दराज से आने वाली गरीब महिलाओं को प्रसव कराने के लिए एक हजार रुपया देना पड़ता है। वहीं आपरेशन से डिलेवरी हुआ तो उनको तीन हजार रुपया देना पड़ता है।
तने से ही मामला समाप्त नहीं हो जाता है वार्ड में जाने पर उनकी पट्टी बदलने व ग्लूकोज की ड्रिप लगाने के लिए पहुंचने वाली कर्मचारी सौ से तीन सौ रुपये तक ले लेती है। पट्टी बदलने के लिए प्रतिदिन स्टाफ नर्स सौ रुपया लेती है। सुबह आठ बजे से डाक्टरों के ड्यूटी पर आने की बात कही जाती है लेकिन मामला कुछ और ही रहता है।
अमर उजाला टीम शुक्रवार को जिला महिला चिकित्सालय में जब पहुंची तो पाया कि सुबह नौ बजे तक चिकित्सालय में तैनात अधिकांश डाक्टर ड्यूटी पर नहीं थे। जबकि मरीज सुबह से परची काउंटर पर खड़े होकर कर्मचारी का इंतजार कर रही थी।
नौ बजे कर्मचारी पहुंचा तो मरीजों का परची बना कर दे दिया। मरीज डाक्टरों के कमरे में पहुंची तो डाक्टर नहीं मिलीं। काफी देर तक इंतजार करने के बाद अधिकांश डाक्टर अपने कक्ष में पहुंची इसके बाद उनका इलाज शुरू हुआ। अधिकांश काउंटरों से कर्मचारी भी गायब रहे।
कहा जा रहा है कि काफी अर्से से जमे लिपिकों का स्थानांतरण नहीं होने से वह मनमानी पर उतारू हैं। चिकित्सालय में आए रामकुमार और विनय कुमार निवासी लालगंज ने बताया कि वह अपनी पत्नी को नार्मल डिलेवरी के लिए चिकित्सालय ले आए थे।
सके लिए उनसे डेढ़ हजार रुपया ले लिया गया। वहीं संगीता और जानकी समेत कुछ अन्य महिलाओं ने बताया कि आपरेशन से डिलेवरी होने पर उनके परिजनों से तीन हजार रुपया लिया गया।