मिर्जापुर में बंदर ने खुद को कमरे में कर लिया बंद।
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मिर्जापुर के वासलीगंज स्थित शेरखां की गली में शनिवार की सुबह भोजन की तलाश में एक कमरे में घुसे बंदर ने अंदर से कुंडी लगा ली। दरवाजा बंद होने के बाद कमरे का सारा सामान बिखेर दिया। खिड़की के पास कोई जाता तो वह हिंसक हो जाता। इससे लोग परेशान हो गए। आखिरकार चार पांच घंटे बाद खिड़की का छड़ काटकर बंदर को बाहर निकाला गया।
शेरखां गली में सतीश गौड़ का मकान है। दूसरे तलपर एक कमरा है। बीच में सीढ़ी है। कमरे में सतीश का पुत्र दुर्गेश और उसकी पत्नी रहती है। दुर्गेश बर्तन बनाने का काम करता है। शनिवार की सुबह दुर्गेश काम पर चला गया। उसकी पत्नी भी काम करने के लिए घर से चली गई। सुबह सात बजे के करीब दो बंदर भोजन की तलाश में पहुंच गए। दरवाजा खुला पाकर एक बंदर घुस गया।
इस दौरान किसी तरह से दरवाजे की कुंडी लग गई। आठ बजे उसकी पत्नी काम कर घर लौटी तो देखा कि दरवाजा अंदर से बंद है। खिड़की से झांक कर देखा तो बंदर अंदर दिखा। बंदर के अंदर बंद हो जाने और सामान नष्ट करने से परिजन परेशान हो गए। कोई भी खिड़की के पास जाता तो वह काटने के लिए दौड़ता। काफी मशक्कत के बाद दोपहर 12 बजे खिड़की में लगे सरिया काट कर बंदर को बाहर निकाला गया।