महिला अस्पताल के निरीक्षण में मरीज से बात करती उत्तर प्रदेश महिला एवं बाल विकास एवं पुष्टाहार सम?
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मिर्जापुर। विधान मंडल की महिला व बाल विकास संबंधित संयुक्त समिति की सभापति व सदस्यों द्वारा विभिन्न गृहों का निरीक्षण किया गया। समिति ने जिला महिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान वित्तीय अनियमितता पकड़ी। कहा कि एक मरीज एक ही दिन में तीन बार नाश्ता और तीन बार भोजन कैसे कर सकता है। रजिस्टर में इसे अंकित किया गया है। समिति ने इसे वित्तीय अनियमितता बताया। सीएमओ और सीएमएस को दिखाकर वित्तीय गड़बड़ी वाले रजिस्ट्रर में हस्ताक्षर कराकर नाराजगी जताई। इससे पहले कछवां थाना, सीएचसी, मंडलीय अस्पताल, कुपोषण वार्ड का निरीक्षण कर फल वितरित किया।
जिला महिला अस्पताल में पहुंची समिति की सभापति सरिता भदौरिया और मझवां विधायक सुचिस्मिता मौर्या व अन्य ने सबसे पहले जननी सुरक्षा वार्ड में पहुंच कर प्रसूताओं की हालचाल जानी। लालगंज के खजुरी निवासी नागेंद्र ने वार्ड के गलियारों में लगे पंखे को निकाल दिए जाने की शिकायत की। निरीक्षण के बाद टीम सीएमएस कक्ष में पहुंच कर अभिलेखों को मंगाया। जननी सुरक्षा व अन्य रजिस्टर को चेक किया। मरीजों को दिए जाने वाले भोजन के रजिस्ट्रर की जांच में एक मरीज को एक दिन में तीन बार नाश्ता और तीन बार भोजन दिया जाना मिला। रजिस्ट्रर में कई जगह पर ओवरलैपिंग मिलने पर टीम ने इसे वित्तीय अनियमितता बताया। सीएमओ और सीएमएस से कार्रवाई करने को कहा। सदस्यों ने मंडलीय अस्पताल में कुपोषण वार्ड में बच्चों और उनकी माताओं को फल वितरित किया। इससे पहले कछवां थाना, कछवां सीएचसी और मोर्चाघर स्थित किशोर संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सीएमओ डा. पीडी गुप्ता, समाज कल्याण अधिकारी गिरीशचंद्र दुबे, जिला कार्यक्रम अधिकारी वाणी वर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गौतम प्रसाद, जिला प्रोबेशन अधिकारी शक्ति त्रिपाठी आदि रही।
बिना नेम प्लेट के होने पर लगाई फटकार
जिला महिला अस्पताल में सीएमएस कक्ष का निरीक्षण करते समय मौजूद स्टाफ नर्स व अन्य स्टाफ द्वारा नेम प्लेट या परिचय पत्र न लगाने पर फटाकर लगाई। इस दौरान कुछ स्टाफ कमरे से निकलने की कोशिश किया जिनको रोका गया। नेम प्लेट लगाकर कार्य करने का निर्देश दिया।
महिला बंदियों से बात कर जानी समस्या
जिला महिला अस्पताल के निरीक्षण के बाद समिति जिला कारागार पहुंची। जिला कारागार में महिला बैरक में जाकर बंदियों से बात की। महिला बंदियों से जेल में मिलने वाले भोजन और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। जेलर अरुण मिश्रा ने समिति से जेल के अस्पताल में स्थायी फार्मासिस्ट नहीं होने की बात कही।