इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने और विरोधी दल के नेता होने के दौरान दो बार मिर्जापुर आगमन में केवल प्रोटोकाल का ही अंतर था। मिर्जापुर और बैरिस्टर युसूफ इमाम का परिवार उनके घर जैसा था।
उन्होंने रामबाग स्थित बंगले में परिवार के सदस्यों के साथ लंच किया था। यह बताते हुए यूपी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व महामंत्री इजहार इरफानी भावुक होकर पुरानी यादें ताजा करते हैं।
लगभग 35 वर्ष पूर्व की घटनाएं उनके मानस पटल पर अंकित होने लगती हैं और वे इंदिरा गांधी के तत्कालीन दौरे की परत खोलने लगते हैं।
इजहार इरफानी ने बताया कि वह 1978 का दौर था जब इंदिरा गांधी प्रतिपक्ष की नेता थीं वे मिर्जापुर आईं तो अपने पारिवारिक मित्र अजीज इमाम के बंगले पर पहुंचना नहीं भूलीं।
बेगम अशरफ इमाम और बेगम अजहर इमाम से शिद्दत से मिलीं। परिवार के बारे में पूछा। कौन सा बच्चा कहां पढ़ रहा है। कौन जॉब में आया इसकी जानकारी ली।लंच भी परिवार के लोगों के साथ ही लिया।
लंच में शाकाहारी थाली परोसी गई थी जिसमें दो किस्म की दाल, दो तरह की सब्जी, चटनी, सलाद और अचार के साथ खीर शामिल थी। फिर पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलीं और कुछ लोगों का नाम लेकर पास भी बुलाया।
इरफानी बताते हैं कि दो वर्ष बाद वर्ष 1980 में श्रीमती गांधी प्रधानमंत्री बनने के बाद फिर मिर्जापुर आई तो बैरिस्टर साहब के बंगले पर ही पहुंची थीं। इस बार पुराने दौरे से फर्क बस प्रोटोकाल और सुरक्षा कर्मियों का ही नजर आया, नहीं तो बैरिस्टर साहब की फैमिली से मुलाकात में कोई लागलपेट नहीं देखने को मिला।
लंच लेने के बाद परिवार के पुराने नौकर जलील बंगाली को देख कर कहा अरे तुम अभी तक यहीं हो, चलो मेरा हाथ धुलवाओ।