ओझला पुल के पास स्थित डूब की जमीन पर प्लाटिंग कार्य जोरों पर।
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अगर आप घर का सपना देख रहे हैं और अपनी गाढ़ी कमाई से प्लाट खरीदने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए। नगर व आस पास के इलाकों में कुछ जगह डूब क्षेत्र में कई एकड़ जमीन में मिट्टी पाटकर अवैध तरीके से प्लाटिंग की जा रही है। जबकि डूब क्षेत्र में निर्माण और प्लाटिंग तो दूर ऐसी जगह नक्शा भी पास नहीं होता है।
इनमें ऐसे भी इलाके हैं जो गंगा के 200 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में भी आते हैं। फिर भी ऐसे प्लाटों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। प्रत्येक वर्ष गंगा में बाढ़ आने के बाद नगर क्षेत्र व आस पास में कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं। सड़कों पर पानी आ जाता है। इन्हें डूब क्षेत्र घोषित किया गया है। ओझला पुल, दूधनाथ तिराहा, सगरा, कंतित, लोहिया तालाब, शिवपुर के आस पास का एक बड़ा इलाका डूब क्षेत्र में आता है। यहां हर साल पानी भर जाता है। इन क्षेत्रों में धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर प्लाटिंग हो रही है। ओझला पुल और दूध नाथ तिराहा के बीच दाहिनी तरफ कई एकड़ डूब क्षेत्र को पाटकर प्लाटिंग की जा रही है। इसी प्रकार सगरा क्षेत्र में विंध्याचल रोड और रेलवे लाइन के बीच डूब क्षेत्र में मिट्टी पाटकर प्लाटिंग की तैयारी की है। यही हाल बसही में भी है। ऐसे कई इलाके हैं जहां डूब क्षेत्र की जमीन को पाटकर प्लाटिंग की जा रही है। इन सड़कों से प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही जन प्रतिनिधियों का भी आना जाना होता है पर इस समस्या पर किसी का ध्यान न जाना चर्चा का विषय बना हुआ है।
आम लोगों को गुमराह कर बेच रहे प्लाट
अवैध प्लाटर जमीन को सही और सटीक बताकर आम और सीधे लोगों को गुमराह करना भी शुरू कर दिए हैं। इतना ही नहीं जमीन को दो सौ मीटर से बाहर व डूब क्षेत्र से अलग होने का दावा कर रहे हैं। डूब क्षेत्र में होने की वजह से यह इलाका पानी में डूब जाता है। जो लोग प्लाट खरीद चुके हैं उनका नक्शा नहीं पास हो रहा है तो वहीं अन्य सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है। बाढ़ के समय आम लोगों के साथ ही प्रशासन को भी इन प्रभावित इलाकों में जूझना पड़ रहा है।
डूब क्षेत्र में वह भी गंगा के 200 मीटर के दायरे में प्लाटिंग या निर्माण कार्य गंभीर मामला है। अवैध प्लाटिंग में लिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इस संबंध में त्वरित कार्रवाई के लिए अधिकारियों को बोला गया है। - योगेश्वर राम मिश्र, कमिश्नर