जिले में इन दिनों धान खरीद की प्रक्रिया में बदलाव के चलते खरीद प्रभावित हो रही है। इसी को लेकर अक्सर विवाद भी हो जा रहा है। किसानों के साथ ही कर्मचारी भी प्रक्रिया में बदलाव के चलते परेशान हैं। सारी परेशानी टोकन को लेकर हो रही है। इसी से खरीद भी प्रभावित हो रही है।
शुुरू में ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों में ही टोकन की व्यवस्था थी। उसके बाद ऑफलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया बंद कर दी गई और केवल ऑनलाइन टोकन ही जारी किया जाने लगा। उसके बाद उसको भी बंद कर दो दिनों तक बिना टोकन के ही खरीद की गई। अब एक बार फिर से तीन दिनों के लिए टोकन जारी किया जाने लगा है। धान खरीद की बार-बार प्रक्रिया बदले जाने से किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। इससे उनमें नाराजगी बढ़ रही है। इसी के चलते चंदौली जिले में खरीदार व अधिकारी के बीच विवाद हुआ था। हलिया, सरकारी विपणन केंद्र मवई कलां प्रथम पर नौ हजार आठ सौ 89 क्विंटल धान 184 किसानों तथा हलिया द्वितीय पर 14 हजार दो सौ 52 क्विंटल धान 260 किसानों से खरीद की गई है। क्रय केंद्र प्रभारी सतीश मिश्रा ने बताया कि 90 प्रतिशत भुगतान हो चुका है। साधन सहकारी समिति भटवारी सिकटा उमरिया के अलावा पीसीओ मवई कला इंदिरा वाटिका गलरा गढ़वा में धान क्रय केंद्र बनाया गया है। जहां पर किसानों से खरीद की जा रही है। क्षेत्रीय किसान गलरा निवासी शिव प्रसाद तिवारी ने बताया कि प्रक्रिया में बदलाव एवं किसानों को टोकन नहीं मिलने धान नहीं खरीदी जा रही है। किसान टोकन के लिए घर एवं सहज जन सेवा केंद्रों पर रतजगा कर रहे हैं। प्रशासन के इस रवैया से किसान काफी नाराज हैं। उनका कहना है कि अगर यही रवैया जारी रहा तो किसानों की धान तौल से वंचित हो जाएगी। वहीं अहुगी कला गांव निवासी जगत बहादुर सिंह का कहना है कि खरीद प्रक्रिया में बदलाव के कारण अभी तक धान की तौल नहीं हो पाई। क्रय केंद्रों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। जिगना, विकास खंड छानबे में तीन धान क्रय केंद्र, भटेवरा में दो तथा एक नरोइया में है ।भटेवरा में दोनों स्थानों पर धान रखने की जगह है, लेकिन नरोइया में नहीं है। तीनों स्थानों पर किसानों को बैठने व पानी आदि की समुचित व्यवस्था तक नहीं है।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी धनंजय सिंह का कहना है कि अब नये प्रकार से ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है। इससे किसानों को कोई समस्या नहीं होगी। अब वे आसानी से अपना धान बेच सकेंगे।