मिर्जापुर। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित 14 महीने के विनायक के माता-पिता को उम्मीद है कि उनका लाडला न केवल अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा बल्कि दुनिया के हर वो काम कर सकेगा जो उसकी उम्र के बच्चे इस समय कर रहे हैं।
एसएमए से विनायक के माता-पिता की गुहार के बाद तमाम लोग व संस्थाओं ने सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया है। कई जनप्रतिनिधियों ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। माता-पिता को भरोसा है कि समय रहते वे अपने लाडले के लिए वो इंजेक्शन खरीद पाएंगे जिसकी कीमत नौ करोड़ रुपये है।
जमालपुर ब्लॉक के करजी निवासी आलोक और प्रतिभा द्विवेदी का बेटा विनायक जन्म से स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी बीमारी से पीड़ित है।
इसका पता तब चला जब सामान्य बच्चों से इतर विनायक के शारीरिक अंग कम हरकत कर रहे थे। साल भर का होने के बाद जब परिजनों ने वाराणसी के एक हॉस्पिटल में बच्चे का परीक्षण कराया तो इस गंभीर बीमारी के बारे में पता चला। इसके बाद परिसार बीएचयू, पीजीआई और फिर एम्स गया। जहां चिकित्सकों ने एसएमए के बारे में ही बताया।
यह भी बताया कि इसका इलाज संभव है पर उम्र दो साल होने के भीतर नौ करोड़ का एक इंजेक्शन लगवाना पड़ेगा।
तब से पूरा परिवार बच्चे की सामान्य जिंदगी के लिए सभी के दर पर जा रहा है। संस्था व सोशल मीडिया के माध्यम से कैंपेन भी चला रहा है। माता पिता को सहयोग मिलना शुरू भी हो गया है पर अभी दिल्ली दूर है। आलोक और प्रतिभा को पूरा भरोसा है कि वे अपने बच्चे को समय रहते इलाज उपलब्ध करा सकेंगे।