देखते ही देखते मौके पर भीड़ लग गई। ग्रामीणों ने हाथी को निकालने का भरसक प्रयास किया लेकिन वजन होने के चलते लाचार रहे। काफी देर तक मल-मूत्र भरे शौचालय की टंकी गजराज छटपटाता रहा। करीब दो घंटे बाद जेसीबी मंगाया गया। टंकी के अगल-बगले जमीन की खोदाई कर करीब चार घंटे बाद हाथी को बाहर निकाला गया लेकिन तबतक उसकी मौत हो चुकी थी। हाथी मालिक के परिवार को जब घटना की सूचना मिली तो कोहराम मच गया।