फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि पर विंध्यधाम दर्शन-पूजन करने के लिए मां के भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर पहुंचे श्रद्धालु मां के भव्य स्वरूप का दर्शन पाकर श्रद्धालु निहाल हो उठे। मंगला आरती से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का दौर देर रात तक चलता रहा। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा एवं मां के जयकारे से विंध्यधाम गुंजायमान हो रहा था।
विंध्याचल मंदिर में रविवार की भोर से ही मां विंध्यवासिनी देवी के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने के लिए भक्तजनों का रेला लगा रहा। नारियल-चुनरी, माला-फूल, रोरी-रक्षा एवं लाचीदाना सहित प्रसाद को डलिया में लेकर श्रद्धालु विंध्यधाम पहुंचे, जहां मां का बड़े ही श्रद्धाभाव से पूजन-अर्चन किया।
विंध्याचल मंदिर पहुंचने के बाद किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में पहुंच कर विधिवत दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि के लिए कामना किया। मां का दर्शन-पूजन करने के बाद श्रद्धालुओं ने विंध्याचल मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर बड़े ही श्रद्धाभाव से पूजन-अर्चन किया।
मंदिर के छत पर जहां एक ओर शहनाई की धुन पर मुंडन संस्कार का कार्य चलता रहा, वहीं आसन पर बैठ कर साधक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच साधना करने में जुटे रहे। भक्तों ने नंगे पांव त्रिकोण परिक्रमा किया।