मोंथा चक्रवात का प्रभाव जिले में शनिवार को भी बरकार रहा। रुक-रुक कर हो रही बारिश से पानी में डूबी फसलें अंकुरित होकर बर्बाद हो रही हैं। धूप न निकलने से किसान बेबस नजर आ रहे हैं। रोज-रोज हो रही बारिश से बची खुची फसलों पर भी ग्रहण लगा हुआ है।
शनिवार को सदर क्षेत्र में 7 एम.एम., चुनार में 1 एम.एम., लालगंज 5 एम.एम. व मड़िहान में 4 एम.एम.को मिलाकर छठें दिन जिले भर में 4.25 मिलीमीटर बारिश हुई। दोपहर बाद कुछ देर के लिए सूर्यदेव के दर्शन जरुर हुए लेकिन फिर बादलों की ओट में छिप गए।
बारिश के बाद पानी में डूबी धान की फसलों को किसान सुरक्षित करने में जुटे रहे। पानी-पानी फसलें पूरी तरह से अंकुरित हो चुकी हैं। खेत के आसपास सूखी जगह भी नहीं जहां फसलों को फैलाकर नमीं दूर कर सके।
कर्ज लेकर की खेती, कैसे अदा करेंगे अब साहूकारों का पैसा
बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई फसलों को लेकर किसानों को चिंता सताए जा रही है। धान के साथ ही रबी सीजन में बाई आलू, चना, मटर सहित अधिकांश स्थानों पर सब्जियों की खेती को नुकसान हुआ।
पड़री, किसान बेचू शर्मा का कहना है कि चार बीघा बाजरा खेत में काटा गया था। जो पानी में डूबने से बर्बाद हो गया है। बाल मुकुंद सिंह, वंशीधर सिंह, राकेशसिंह, संजय प्रजापति, राजबली यादव, हरिशंकर तिवारी, मुन्नी दुबे आदि कहना है कि किसान सेठ और साहूकारों के अलावा साधन सहकारी समितियों से कर्ज पर खाद और बीज धान की रोपाई किए बेमौसम बारिश से सबकुछ चौपट हो गया।
हलिया, कई दिनों से हलिया ब्लाक क्षेत्र के सोनगढ़ा ,राजपुर, बढ़वार, बेलाही, कुशियरा ,सगरा, नदना, बैधा , थोथा ,खम्हरिया , मनिगढ़ा , गजरिया, देवरी, बरया, तीता, सिकटा, पटपरा, वीरपुर, मझिगवां, कोलहा, गड़बड़ा,बरबसा ,बारीपुर, बरबसा, बबुरा कलां सहित पूरे विकासखंड में मोंथा चक्रवात का असर बना हुआ है।
काटकर खेतों में पड़ी धान की फसलें अंकुरित हो चुकी है। लालगंज, बे-मौसम बारिश से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। विकासखंड के रेही, गगहरा, मझियार, तुलसी, खैरा, कोलकम, पतार, मिश्रपुर, पतुलकी, बसही, रामपुर, हर्दिहा, अमहा, तिखोर, नेवढ़िया, घराघनपुर, बसकोप, गंभीरापुर, रजई, कटाई, नदगहना, बघई, नरैना, सोनवर्षा, लालगंज, जगदीशपुर, खरिहट समेत दर्जनों गांवों में धान की फसल पानी में डूब गई है।
चक्रवाती तुफान और रुक-रुक कर हो रहे बारिश के चलते खेत में धान की फसल गिरकर सड़ रही। वहीं काटकर खेतों में पड़ी फसल पूरी तरह से अंकुरित हो गई है। बैंक और समितियों से कर्ज की भरपाई कैसे होगी। -राजेंद्र किसान, मतवार हलिया।
कर्ज लेकर सात बीघा धान की खेती हुई थी। चक्रवाती तुफान के चलते फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। आदमी को कौन कहे पशुओं के चारे का भी संकट खड़ा हो गया है। -अवधराज सिंह किसान, पटपरा हलिया।
टोल फ्री नंबर पर 72 घंटे के अंदर दर्ज कराएं नुकसान की शिकायत
खरीफ 2025 में कुल 28890 हेक्टेयर क्षेत्रफल का प्रधानमंत्री फसल बीमा कराया गया है। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने बताया बीमित धनराशि 248 करोड़ 1 लाख 12 हजार रुपये है। फसल यदि बर्बाद हुई है तो प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने वाले किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के अंदर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
रबी 2025-26 के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर बीमा शुरू किया जा चुका है, किसान 31 दिसंबर तक अपनी फसल का बीमा करा सकते हैं।
जिलाधिकारी ने बताया जुलाई माह में अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ से जो पंचायत प्रभावित थी उनमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत जिन किसानों द्वारा बीमा कराया गया है, योजना की गाइडलाइन के अनुसार मध्य-अवधि में बनने वाले क्लेम के अंतर्गत राजस्व, कृषि एवं बीमा कंपनी के कर्मचारी के साथ संयुक्त सर्वे कराते हुए उत्पादन में हुई क्षति प्रतिशत का 25 प्रतिशत क्षतिपूर्ति के रूप में 5 करोड़ 13 लाख 65 हजार 540 रुपये की धनराशि संबंधित किसानों के खातों में बीमा कंपनी द्वारा भेजी जा चुकी है।