भभौरा गांव का चोरपाल जिसकी मनाई गई तेरही ।
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पालतू कुत्ते की तेरहवीं, एक बारगी यह सुनने में अटपटा और चौंकाने वाला लगता है पर यह सच है। मिर्जापुर के भभौरा गांव में रविवार को कुत्ते के मालिक ने तेरहवीं का आयोजन किया। इसके पीछे उनका तर्क यह था कि दरअसल चोरपाल उनके लिए कुत्ता नहीं बल्कि पारिवारिक सदस्य बन चुका था।
ऐसे में परिवार के एक सदस्य के साथ छोड़ने के बाद जो करना चाहिए उन्होंने वो किया। यह आयोजन क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भले ही दुनिया के लोग इक्कीसवीं सदी का जश्न मनाने का दावा कर रहे हो।लेकिन यहां के लोगों में पुरातन परम्परा को बरकरार रखने और जीवों के प्रति प्रेम आज भी बहुत है।
इंसान तो क्या पशु पक्षी, जानवर के प्रति भी उनकी ममता देखते ही बनती है। भभौरा गांव में चोरपाल 17 वर्ष (पालतू कुत्ता) का तेरहवीं रविवार की शाम को किया गया। कुत्ता पालक माता दीन यादव, सुसील कुमार ने बताया कि नवम्बर माह वर्ष 2007 को कुत्ते को 21 दिन की अवस्था में घर लाए थे।
इसकी मृत्यु 12 फरवरी को 17 वर्ष की अवस्था में हो गई। उस दिन उनका पूरा परिवार काफी दुखी था। उनको लग रहा था कि कुत्ता नहीं बल्कि उनके परिवार के किसी सदस्य की मौत हो गई है। कुत्ते की मौत के बाद गांव के बाहर सिवान में खुद की जमीन में उसे दफन कर दिया गया।
तत्पश्चात शोक संदेश कार्ड छपवा कर गांव में बटवाया। रविवार की शाम 150 लोगों ने कुत्ते की तेरहवीं में भोजन भी किया। तेरहवीं की चर्चा इलाके में जोरों पर है।