मिर्जापुर। सिटी क्लब में श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन चिन्मयानंद बापू ने कहा कि प्रभु श्री राम ने जो किया व भगवान श्री कृष्ण ने जो कहा वो करें। श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठा कर वृजवासियों कर रक्षा किया। इंद्र का अभिमान चूर होने पर उन्होंने भगवान कृष्ण का बड़ी ही सुंदर स्तुति की और भगवान कृष्ण ने उन्हें क्षमा कर दिया। भगवान की लीलाओं पर संदेह करना मूर्खता है।
कथा के रसपान के दौरान बापू ने कहा कि एक बार नंद बाबा ने भूलवश यमुना में अर्धरात्रि में स्नान करने चले गए तो वरूण देवता के दूत उन्हें वरूण लोक लेकर गए, तब भगवान कृष्ण उन्हें छुड़ा कर लाए थे। उन्होंने कहा कि किसी भी नदी में रात्रि में स्नान नहीं करना चाहिए, इससे वरूण देवता नाराज होते हैं। बापू ने एकादशी व्रत के महत्व के बारेे में बताते हुए कहा कि सभी वैष्णव को एकादशी व्रत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर व्रत ना कर सकें तो कम से कम उस दिन चावल का सेवन नही करना चाहिए। पांचवें अध्याय के क्रम में कहा कि श्री कृष्ण ने जो रास रचाया उसमें शामिल होने वाली गोपियां कोई साधारण गोपियां नहीं थीं, बल्कि बड़े बड़े ऋषि महात्मा भी गोपियों का रूप धारण कर रासलीला में शामिल ह़ुए थे। उन्होंने बताया कि जो भी भगवान की लीला पर संदेह करता है, वह मूर्ख है, भगवान कृष्ण ने यदि गोपियों के वस्त्रों को चुराया तो समय पड़ने पर द्रौपदी चीर हरण के दौरान साड़ियों का ढ़ेर भी लगा दिया था। भगवान अगर माखन चोरी किया जो वृजवासियों की रक्षा के लिए सात कोस के गिरिराज गोवर्धन पर्वत को अपने उंगलियों पर सात दिनों तक उठाए रहे। बापू ने कहा कि कृष्ण ने जो गीता में कहा उसका अनुसरण करें। साथ ही भगवान राम ने जो अपने जीवन काल में किया उसका पालन करें। इसके बाद बापू ने कंस वध की कथा सुनाई। इसके अलावा उद्घव गोपी संवाद तथा रुक्मिणी विवाह को धूमधाम से संपन्न कराया।