ड्रमंडगंज। महीनों से बारिश न होने के कारण हलिया विकास खंड इलाके की सैंकड़ों बीघा फसल सूख गई हैं। स्थिति यह हो गई कि पितृ विसर्जन के लिए किसानों को बाजार से उड़द खरीदना पड़ रहा है। हालांकि किसानों ने बैंकों व सूदखोरों से कर्ज लेकर खेतों में बीज व खाद डाले थे। लेकिन खेती करने पर भी कोई लाभ नहीं मिल रहा है। फसली ऋण की भरपाई को लेकर किसान हताश हैं।
हलिया विकास खंड़ के करीब 150 गांव महीनों से बरसात नहीं हुई है। असिंचित एवं पठारी क्षेत्र होने के नाते यहां सिंचाई का भी कोई खास इंतजाम नहीं है। जिसके कारण किसानों की बोई फसलें करीब 80 प्रतिशत सूख गई है। किसान सूखा के अलावा ओलावृष्टि की मार से अभी उबरे ही नहीं थे कि इस बीच सूखे की भयंकर मार सामने आ गई। लिहाजा यहां के किसान अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। बैंक के कर्ज बच्चों की पढ़ाई, सामाजिक कार्य कैसे होंगे इसकी समस्या अब उनके सामने खड़ी गई? यहां तक की क्षेत्रीय किसान अपने खेतों में धान, उरद, मक्का, तिल्ली, तिल, ज्वार, बाजरा, अरहर आदि की खेती किए थे जो कि सूख गई हैं। क्षेत्र के भैसोड़ बलाय पहाड़, लहुरियादह, सोनगढा, बंजारी, मड़वा धनावल, खोदाईपुर, बबूरा कलॉ, पवारी खुर्द, बढ़वार, मनिगढा, गजरिया, परसीया, पिपरा, मतवार, हर्रा आदि गांवों के किसान जगदीश सिंह, श्यामपाल सिंह, प्रशांत दुबे, संतोष कुमार, नारेंद्र बहादुर सिंह, विनय कुमार सिंह, आशीष कुमार दुबे, माधोलाल, शंकरलाल आदि का कहना है कि हम किसानों की बोई फसलें बारिश न होने से पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। यहां तक की पितृ विसर्जन के लिए बाजार से उड़द खरीदना पड़ रहा है। किसी तरह से व्याज पर कर्ज लेकर खेतों में खाद व बीज आदि डाले गए थे। जो अब व्यर्थ हो गया है ।