समाजवादी पार्टी की 2002 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनी थी। उस समय मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कन्या विद्या धन योजना शुरू की थी। उसमें बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था। इस बीच दो सरकारें बदलीं, लेकिन जांच रिपोर्ट का खुलासा न होने से कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अब नई सरकार बनने के बाद रिपोर्ट बाहर आई तो मेरठ जनपद में रहे एक एसडीएम, तीन तहसीलदार और 16 लेखपाल इस फर्जीवाड़े में फंस गए हैं। इन सभी पर कार्रवाई के लिए शासन से पत्र आया है।
ये है पूरा मामला
कन्या विद्या धन योजना के अनुसार निर्धन 12वीं उत्तीर्ण कन्याओं को 20-20 हजार रुपये आर्थिक सहायता दी गई थी। इस योजना में तहसील कर्मचारियों की साठगांठ से फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाकर ऐसे लोग भी लाभ उठा गये, जो पात्र ही नहीं थे। प्रदेश में यह घोटाला 2005-06 और 2006-07 में हुआ। फर्जीवाड़े की शिकायत जब तक हुई, तब तक 2007 में प्रदेश में बसपा की सरकार आ चुकी थी। बसपा सरकार में मामले की जांच प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान को सौंप दी गई। पूरे प्रदेश के जनपदों में जांच हुई, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। 2012 में फिर से सपा सरकार आई और जांच रिपोर्ट दबा दी।