प्रशासन ने मुजफ्फरनगर और शामली में 511 मुकदमे दर्ज किए थे, जिनमें हत्या और दुष्कर्म भी मामले शामिल थे। दो साल से ज्यादा वक्त तक चली एसआईटी की जांच में 170 मुकदमे खारिज किए थे, जबकि 169 में एफआर लगाई थी। बाकी 172 मुकदमे कोर्ट में चार्टशीट दाखिल की गई। कोर्ट की कार्रवाई के दौरान 41 मुकदमों का निस्तारण हो चुका है। इन मुकदमों में अभी तक किसी को भी कोई सजा नहीं हो सकी। सभी मुकदमों में गवाह पक्षद्रोही होने से आरोपी बरी हो चुके है। वर्तमान में कोर्ट में 131 मुकदमे विचाराधीन है, जिनमें 13 मुकदमे हत्या और 11 हत्या के प्रयास तथा छह मुकदमे रेप के है।
गत पांच फरवरी को लखनऊ में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान तथा भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत के नेतृत्व में भाजपा नेताओं और खाप चौधरियों के प्रतिनिधिमंडल ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर दंगे के दौरान के द्वेषवश दर्ज कराए गए फर्जी मुकदमो की खत्म करने की मांग उठाई थी। सीएम के निर्देश पर शासन के विशेष सचिव राजेश सिंह ने मुजफ्फरनगर और शामली के डीएम को पत्र भेज कर दंगे के 131 मुकदमों में मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट तलब की है। डीएम राजीव सिंह ने बताया कि शासन का पत्र मिलने के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है। एसपीओ और डीजी एसपीओ से मुकदमों की वस्तु स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है।
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