बसपा की अंदरूनी राजनीति में फिर मिला झटका
योगेश वर्मा को लोकसभा चुनाव के कुछ दिन बाद ही अक्तूबर 2019 में बसपा की अंदरुनी राजनीति के चलते पार्टी से पत्नी सहित निष्कासित कर दिया गया। यहीं से पूरा रानजीतिक माहौल बदल गया। तभी से चर्चा थी कि इस बार योगेश वर्मा बसपा नहीं बल्कि दूसरी पार्टी में जाएंगे।
सपा और भाजपा में जाने की लगातार चर्चा होती रही। लेकिन योगेश वर्मा के साथ बड़ी संख्या में मुिस्लिम समर्थकों के जुड़े होने के कारण भाजपा की अटकलें खारिज भी होती रही। आखिर में वही हुआ, जिसको लेकर कयास लगाए जा रहे थे। अब 16 जनवरी को हाथी से पैदल हुए योगेश वर्मा साईकिल कीसवारी करते नजर आएंगे।
स्थानीय राजनीति में होगी उथल पुथल
योगेश वर्मा दलितों के बीच तो अपनी पैठ बना ही चुके हैं। लेकिन अगर हस्तिनापुर की बात करें तो उनका असर गुर्जर, और मुस्लिम वर्ग में भी है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के लिए बड़ी चुनौती पेश करेंगे, यह तय हो चुका है। यही नहीं सपा ने भी आने वाले दिनों को देखते हुए अगला गेम खेल दिया है।
हस्तिनापुर से विपिन मनोठिया टिकट की दावेदारी कर रहे थे। अब उन्हें जिला पंचायत की राजनीति में ले जाने की चर्चा है। क्योंकि शासन स्तर पर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने की चर्चा है।