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अलविदा 2018: पूरा साल हादसों के नाम, मेरठ जोन में गई 2585 लोगों की जान

Sat, 29 Dec 2018 05:08 PM IST
दुष्यंत शर्मा मनु चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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सड़क हादसा - फोटो : सांकेतिक फोटो
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साल 2018 अपने अंतिम पड़ाव पर है। सड़क सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने तमाम अभियान चलाए, लेकिन मेरठ जोन की सड़कों पर 11 माह में 2585 लोगों की जान चली गई। सड़क दुघर्टनाओं से तो यही लग रहा है कि सड़क सुरक्षा समिति के जो दावे किए गये थे, वह कमजोर रहे। सबसे ज्यादा बुलंदशहर की सड़कों पर लोगों की जान गई है। गौतमबुद्घनगर दूसरे नंबर पर है।

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सड़क दुघर्टनाओं को रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस के साथ एनएचएआई, विकास प्राधिकरण, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी की भी जिम्मेदारी है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा मौत हाईवे पर हो रहीं हैं। रोजाना तीन से चार सड़क दुघर्टनाएं होती हैं, जिनमें एक की मौत और करीब चार घायल होते हैं। दुघर्टनाओं के यह आंकड़े वह हैं जिनकी एफआईआर होती है, जबकि बड़ी संख्या ऐसी भी दुघर्टनाओं की हैं, जिनकी कोई शिकायत दर्ज नहीं होती या जिन घायलों की उपचार के दौरान मृत्यु हो जाती है।

ओवर स्पीड में सबसे ज्यादा मौत
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के डॉ. गौरव गुप्ता बताते हैं कि ओवर स्पीड भी सड़क दुघर्टनाओं का एक मुख्य कारण है जिसके कारण हाईवे पर सबसे ज्यादा मौत होती हैं। ब्लैक स्पॉट, भारी वाहन, दो पहिया वाहनों पर बिना हेलमेट भी मौत के कारण हैं।

चलाया जाए प्रभावी अभियान

एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी का कहना है कि सबसे ज्यादा मौत हाईवे पर हो रही हैं। ट्रैफिक पुलिस स्कूल, कॉलेज में ट्रैफिक नियमों के बारे में लगातार जागरूक भी कर रही है। ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जाती है। उनका कहना है कि भारी वाहनों के लिए मेरठ में अमर उजाला द्वारा चलाए गये सफल अभियान से शहर में हादसों की संख्या में कमी हुई है।
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हादसों का ब्योरा 
  जिला                   मौतें                              घायल           दुर्घटनाएं
- बुलंदशहर             468                                676               853
- गौतमबद्धनगर        410                                691               980
- मेरठ                     394                                659               920
- गाजियाबाद             376                                713              942
- मुजफ्फरनगर          292                                396              502
- सहारनपुर               238                                290              386
- हापुड़                    203                                 289              331
- बागपत                  110                                 227               227
- शामली                   94                                  170               203

(यह आंकड़े ट्रैफिक पुलिस के अनुसार एक जनवरी 2018 से 30 नवंबर 2018 तक के हैं।)

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