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Meerut News: मां कालरात्रि की पूजा से होता है नकारात्मक शक्तियों नाश

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प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में नवरात्र के सातवें के दिन हुई पूजा
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हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में चैत्र नवरात्र के अवसर पर चल रही दुर्गा पूजा महोत्सव के सातवें दिन दुर्गा मां के सातवें स्वरूप कालरात्रि की विधिविधान से हवन-यज्ञ के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूजा में शामिल होकर धर्म लाभ अर्जित किया।
शुक्रवार को श्रद्धालु मां कालरात्रि की पूजा में शामिल होने के लिए पहुंचे। दिन की पूजा के बाद रात 9:00 बजे से पवन यज्ञ शुरू हुआ जो रात 2:00 बजे तक चलता रहा। जिसमें विश्व शांति के लिए माता से प्रार्थना की गई। यज्ञ में मौजूद श्रद्धालुओं ने संपूर्ण आहुति डाली। मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा की सातवीं शक्ति माता कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। शास्त्रों में माता कालरात्रि को शुभंकरी, महायोगीश्वरी और महायोगिनी भी कहा जाता है। माता कालरात्रि की विधिवत रूप से पूजा अर्चना और व्रत करने से मां अपने भक्तों को सभी बुरी शक्तियां और अकाल मृत्यु से बचाती हैं। इस पूजा की ऐसी मान्यता है कि जिसे पूर्ण करने से भक्तों को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। माता के इसी स्वरूप से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसलिए तंत्र मंत्र करने वाले माता कालरात्रि की विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इनकी पूजा से शनि के दुष्प्रभाव भी दूर होते हैं।
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आचार्य मुकेश शांडिल्य ने माता की कथा सुनाई। कहा कि इनके उपासक को अग्नि भय, जल, भय, जंतु, भयशत्रु, भय,रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते। हमें निरंतर इनका स्मरण, ध्यान और पूजन करना चाहिए। पूजा संपन्न कराने में पंडित चंद्रप्रकाश शुक्ला, रोहित चौधरी, शिवानी, निरमेश, रिंकी, आदित्य त्यागी, जीतू त्यागी, राखी, रितु त्यागी आदि का सहयोग रहा।
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