जिले में खाद्यान्न की कमी नहीं
जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह का कहना है कि जनपद में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं है। जिले में हर महीने 1.26 लाख क्विंटल गेहूं और 84 हजार क्विंटल चावल का वितरण किया जा रहा है। विश्व खाद्य दिवस को देखते हुए इस बार तीन दिन ज्यादा यानि 17 अक्तूबर तक गेहूं और चावल का वितरण किया जाएगा।
एमएसपी से कम मिल रहा दाम
किसानों का कहना है कि सरकार गेहूं और धान की खरीद एमएसपी पर केवल छह फीसदी किसानों से ही करती है। छोटे किसानों को गांव में ही बिचौलियों को अपनी फसल एमएसपी से कम दाम पर बेचनी पड़ती है। गेहूं, धान, ज्वार और बाजरा को आवारा पशु ही चट कर जाते हैं।
रसायनों से खाद्यान्न की गुणवत्ता प्रभावित
रसायनों के अधिक प्रयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है और कीटनाशकों के प्रयोग से खाद्यान्न की गुणवत्ता को हानि पहुंच रही है। बीमार मृदा की फसल भी बीमार ही होती है।
- डॉ. अशोक सिंह, केवीके हापुड़
चारे के लिए उगा रहे मक्का और ज्वार
गन्ने की खेती के चलते गेहूं और धान का रकबा प्रभावित हुआ है। ज्वार, बाजरा और मक्का पशुचारे के लिए उगाई जा रही है। जौ का रकबा धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
- ब्रजेश चंद्र, उप निदेशक, कृषि विभाग, मेरठ
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