फ्लैट के प्रति रुझान घटा
मेडा और आवास विकास के मुताबिक लोगों का फ्लैट के रुझान तेजी से घटा है। आलम यह है कि आवास विकास के जागृति विहार एक्सटेंशन में 2304 फ्लैट हैं। लोग इन्हें खरीदने के बाद भी सरेंडर कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में आवास विकास ने फ्लैट की कीमतें कम की है, बावजूद इसके लोगों का रुझान इस ओर नहीं बढ़ा है।
घर बनवाने में ये आए बदलाव
पहले
-रसोई घर पिछले हिस्से में मुख्य द्वार की सीध में बनाई जाती थी।
-पौधे बालकनी या छत पर रखे जाते थे, भीतर कुछ प्लांट का ही था चलन।
-घर के मध्य में आंगन के पार बाथरूम बनाया जाता था।
अब
-घर में सेपरेट कमरा अटैच बाथरूम।
-धूप और हवा के लिए हर कमरे में प्रॉपर बैंड वेंटीलेशन और ओपन स्पेस भी बनवा रहे।
-मुख्य द्वार के पास पार्किंग, रेस्ट रूम और सटकर रसोई।
-वर्क फ्रॉम के चलन में आने से ऑफिस की फीलिंग को बैठक को ऑफिस जैसा लुक।
-वास्तु के हिसाब से निर्माण का चलन बढ़ा।
-घर के नक्शे में टैरेस गार्डन और फैक्टरी के ओपन स्पेस में भी गार्डन।
बहुमंजिला इमाारतों में जनसंख्या घनत्व अधिक रहता है। लोग अपनी जमीन अपनी छत की सोच को हावी किए हुए हैं। ऐसे में फ्लैट कल्चर से दूरी बनाकर मकान व प्लॉट को ज्यादा तरजीह दी जा रही है। -विजय कुमार सिंह, नगर नियोजक मेडा।
रैपिड कॉरीडोर के तेजी से आयाम लेने का असर घरों के नक्शों पर दिख रहा है। लोग ग्राउंड फ्लोर में पार्किंग के साथ ही सेपरेट रूम सेट तैयार करवा रहे हैं। दूसरी मंजिल के लिए सीढि़यां बाहर से लेना चाहते हैं। -देवेंद्र मोहन शर्मा, आर्किटेक्ट
लिविंग एरिया और लॉबी पहले छोटे ही होते थे, लेकिन अब लोगों की सोच बदली है। सूरज की रोशनी घर में आए, इसलिए लिविंग रूम और लॉबी का क्षेत्र बढ़ गया है। छत पर टेरिस गार्डन बनवाना चाहते हैं। -चिराग गुप्ता, अध्यक्ष मेरठ आर्किटेक्ट एसोसिएशन