देश के नाम विजेताओं के पैगाम
नन्हीं कलम से निकले आजादी के इन नारों ने समाज को देशभक्ति का नया संदेश दिया। देश के नाम इन पैगाम में कहीं शहादत को नमन किया कहीं भविष्य के भारत की कल्पना की गई।
लाखों लाल मिटे धरती पर, आजादी हमको पानी थी, न जाने कितने भगत सिंह ने जान की दी कुर्बानी थी -श्रेयांशी तेवतिया
-कोई गीत लिखूं, पैगाम लिखूं, मैं जन्मभूमि को सलाम लिखूं, सरहद पर जो भाई रक्षक है, मैं उनका पहला नाम लिखूं -हेमा
-जल थल नभ में, युद्ध करता जब जवान है, जीवन मरण का है न भय उनको, एक ही धर्म, उन सबका है, सुरक्षा, बस ये ही आज, देश के नाम पैगाम है। -रश्मि विहान
-फिर एक दीप देश के नाम जलेगा, फिर एकता का पैगाम मिलेगा, इस बार भी हमको जीत मिलेगी, जनमानस में प्रीत जगेगी -सिमरन अंसारी
-तुम जमीं की बात करते हो, वो पहाड़ों का सीना चीर तिरंगा फहराकर आए हैं, ये देखो इस देश के लाल, आसमां व कारगिल दोनों जीत लाएं हैं। -महिमा निषाद
-फर्क बहुत पड़ता है, साथ मिलकर चलने से, संतुलित मन करने से, बेकार के खर्चों से छोटे छोटे लक्ष्यों से। -धनंजय कौशिक
लेखन में ये रहे विजेता
17 से 22 आयु वर्ग
श्रेयांशी तेवतिया, धनंजय कौशिक, महिमा निषाद, सिमरन अंसारी, काजल भंडारी विजेता बने।
23 से अधिक आयु वर्ग
रश्मि विहान, रीतिका टुटेजा, सारिका भटनागर, रिचा जैन व हेमा ने क्रमश: स्थान पाया।
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