नौतपा तपता है तो खूब होती है बारिश
नौतपा से पहले ही इस बार सूरज अंगारों की मानिंद दहकने लगा। ऐसे में घाघ की कहावतों का याद आना स्वाभाविक है। कहते हैं कि जेठ में नौतपा जब खूब तपता है तो बारिश जमकर होती है। यदि नौतपा के दौरान बारिश हो गई तो इसे नौतपा का गलना कहा जाता है।
राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय के प्रभारी निदेशक डॉ. मनोज गौतम बताते हैं कि नौतपा में अगर बारिश हो जाए तो तय है कि उस साल बारिश नहीं होगी और अकाल पड़ जाएगा। इस बार सोमवार से शुरू नौतपा दो जून तक रहेगा।
तपिश को देखते हुए ऐसे में ऐसे कह सकते हैं कि ये नौ दिन भीषण गर्मी के होने वाले हैं। इस नौतपा में भीषण गर्मी के खगोलीय कारण भी हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. ब्रजेंद्र मिश्र बताते हैं कि इन नौ दिनों के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने दौरान सबसे ज्यादा लू और गर्मी पड़ती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि घाघ की यह कहावत इस बार भी मौसम पर सटीक बैठती है या नहीं।
प्रसिद्ध है घाघ और भड्डरी की कहावतें
भारतीय लोक संस्कृति में मौसम और कृषि को लेकर घाघ और भड्डरी जैसे कवियों की कहावतें सदियों से ग्रामीण जीवन का आधार रही हैं। नौतपा, रोहिणी नक्षत्र और गर्मी को लेकर प्रसिद्ध और दिलचस्प कहावतें हैं। भारतीय लोक संस्कृति और ग्रामीण समाज में नौतपा को लेकर मौसम का आकलन करने की पुरानी और बेहद सटीक परंपराएं रही हैं।
फिलहाल भीषण गर्मी को लेकर सड़कों पर गरीबों, मेहनतकशों का सबसे कड़ा इम्तिहान शुरू हो गया है। नौतपा में तापमान में भारी बढ़ोतरी होने और भीषण लू चलने का अनुमान है।
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फिलहाल दोपहर के समय तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस पार जाने के कारण बाजारों और सड़कों पर आवाजाही ठप हो जा रही है। नौतपा के दौरान जब सूरज अपने तल्ख तेवर के साथ आग उगलता है, तो आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। अत्यधिक तापमान के कारण शरीर में पानी की कमी होने से हीट स्ट्रोक के साथ चक्कर आने, सिरदर्द और उल्टी की शिकायतें भी शुरू हो गई हैं। ऐसे में सावधानी न बरतने पर नौतपा सेहत पर भी भारी पड़ सकता है।
भीषण गर्मी में बरतें यह सावधानियां
आग उगलतेे सूरज की गर्मी से बचने के लिए उपायों पर अमल न किए तो मुश्किल पैदा हो सकती है। चिकित्सकों की सलाह है कि प्यास न लगी हो तो भी लगातार पानी पीते रहें। घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल हमेशा साथ रखें। नींबू पानी, छाछ, लस्सी, आम पन्ना और ओआरएस के घोल का सेवन करें।
सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब धूप सबसे तेज होती है तब बाहर निकलने से बचें। सिर को ढंकने के लिए टोपी, छाते या सूती गमछे का इस्तेमाल करें। आंखों पर सनग्लासेस जरूर लगाएं। इन नौ दिनों में ज्यादा भारी, तैलीय, बासी भोजन करने से बचें। तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे मौसमी फलों को अपनी डाइट में शामिल करें।
29 मई तक तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का अनुमान है। इसके बाद ही राहत की संभावना है। - डॉ. यूपी शाही,मौसम वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय मेरठ
ग्रामीण इलाकों में सदियों से मौसम का सटीक अनुमान लगाने के लिए घाघ और भड्डरी की कहावतें बहुत लोकप्रिय हैं। घाघ मौसम और कृषि के वैज्ञानिक माने जाते हैं। - प्रो. दीपा त्यागी, हिंदी विभागाध्यक्ष, इस्माइल डिग्री कॉलेज मेरठ