रविवार सुबह से मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। सुबह से रुक-रुककर रिमझिम बारिश होती रही। कभी आसमान में घने बादल छाए रहे तो कभी हल्की बारिश ने मौसम को ठंडा कर दिया। बारिश और बादलों के कारण दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हवा में ठंडक घुलने से लोगों को पिछले कई दिनों से जारी गर्मी और उमस से राहत मिली है।
शनिवार को पूरे दिन मेरठ में बारिश होती रही। रविवार को भी सुबह से चल रही ठंडी हवा और रिमझिम बारिश के कारण मौसम खुशनुमा हो गया। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। इस दौरान कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।
हवा से धान की फसल को नुकसान
बारिश के साथ तेज हवा चलने से खेतों में खड़ी धान की फसल प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर धान की फसल के पौधे झुक गए हैं। किसानों के अनुसार, यदि हवा और बारिश का सिलसिला जारी रहा तो पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान की फसल को नुकसान हो सकता है। हालांकि हल्की बारिश से खेतों में नमी बढ़ने से अन्य खरीफ फसलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
अगले 24 घंटे बारिश के आसार
मौसम विभाग के ,अनुसार अगले 24 घंटे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला रह सकता है। बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। बारिश का दौर थमने के बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है।
बारिश से खरीफ फसलों पर बढ़ा खतरा, रबी की तैयारी को मिलेगी नमी
शनिवार से शुरू हुई बारिश से मौसम का मिजाज बदल गया। बारिश और तेज हवाओं का असर खेतों में खड़ी खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका है। खासकर पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान और मोटे अनाज की फसलों में तेज हवा के साथ बारिश से पौधे गिर सकते हैं। वहीं, दूसरी ओर बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनने के कारण आगामी रबी सीजन की तैयारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर के अनुसार, इस समय धान, गन्ना, मक्का, बाजरा, उड़द और मूंग समेत कई खरीफ फसलें खेतों में खड़ी हैं। जिन खेतों में फसल पकने की अवस्था में पहुंच गई है, वहां तेज हवा और बारिश से फसल गिरने की आशंका रहती है। इससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ कटाई में भी देरी हो सकती है। दलहनी फसलों में लगातार नमी रहने से फलियों और दानों में फफूंद व सड़न का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि गन्ने के खेतों में यदि लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती। इससे फसल की वृद्धि और पौधों का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। किसानों को खेतों में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए और जरूरत के अनुसार जल निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए।
रबी की तैयारी के लिए बारिश फायदेमंद
डॉ. सेंगर के अनुसार, बारिश से मिट्टी में बनी नमी आगामी रबी फसलों के लिए उपयोगी साबित होगी। गेहूं, सरसों, आलू और अन्य रबी फसलों की बुवाई से पहले खेत तैयार करने में इसका लाभ मिल सकता है। पर्याप्त नमी रहने से शुरुआती सिंचाई की जरूरत भी कम हो सकती है। हालांकि, बारिश के तुरंत बाद खेत में जुताई या बुवाई करने से बचना चाहिए। मिट्टी जब जुताई के लिए उचित स्थिति में आ जाए, तभी खेत की तैयारी करना बेहतर होगा।
फिलहाल सिंचाई और छिड़काव रोकें
कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को सलाह दी कि बारिश के दौरान खेतों में अतिरिक्त सिंचाई न करें। रासायनिक दवाओं और उर्वरकों का छिड़काव भी फिलहाल रोक दें। मौसम साफ होने और खेतों से अतिरिक्त पानी निकलने के बाद ही फसल की स्थिति देखकर अगली कृषि क्रिया करें। विशेष रूप से पकी धान और दलहनी फसलों में लगातार नमी पर नजर रखें।
सहारनपुर में 14 घंटे की बूंदाबांदी से 8 डिग्री गिरा तापमान
जनपद में शनिवार दोपहर एक बजे से रविवार सुबह चार बजे तक लगातार बूंदाबांदी हुई। इससे तापमान में आठ डिग्री सेल्सियस की गिरावट रही। इससे मौसम ठंडा हो गया। सुबह के समय पंखे बंद करने पड़े। रविवार को सुबह से बादल छाए हुए हैं। उधर, बाढ़ की आशंका को देखते हुए शाकंभरी देवी में दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की दर्शन से रोका गया।
शामली में रुक-रुककर हो रही बारिश, आसमान पर छाए बादल
शामली जिले में रात को रुक-रुककर बूंदाबांदी हुई और सुबह पांच बजे से थमी है। अभी जिले में बादल छाए हुए हैं। बारिश होने के आसार बने हैं।
मुजफ्फरनगर में छाए बादल, कोल्हू पर काम बंद
जिले में रात में रुक-रुककर बारिश होती रही। रविवार सुबह से आसमान में बादल छाए हुए हैं। तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। जहां कोल्हू का संचालन शुरू हो गया था, ईंधन गीला होने के कारण रोक देना पड़ा है।
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