खरखौदा। क्षेत्र में पिछले तीन दिन से रुक-रुककर बरसात हुई। जिससे सभी चीनी मिलों के गन्ना क्रय केंद्रों पर जलभराव हो गया। कई केंद्र पर कई दिन से गन्ना पड़ा हुआ है। किसी केंद्र पर एक सप्ताह से तौल ही नहीं चली है। किसानों का गन्ना खेतों में सूख रहा है। खेत खाली नहीं होने से गेहूं की बुआई पिछड़ रही है।
इस वर्ष शरद ऋतु में अनुमान से अधिक बरसात हुई। बरसात बार-बार होने से गेहूं की बुआई के लिए तैयार किए खेतों में जलभराव हो गया। जिससे इस वर्ष अनुमान से कम ही गेहूं की बुआई हुई है। 10 जनवरी होने के बाद भी किसानों के खेतों में गन्ने की फसल खड़ी है। क्षेत्र में अधिकतर गन्ने की फसल कटने के बाद भी गेहूं की बुआई होती है। मिलों द्वारा समय से इंडेंट जारी नहीं करने पर किसानों को पर्ची नहीं मिल पा रही है। वहीं, इस वर्ष जब से गन्ना पेराई सत्र शुरू हुआ है बार-बार बरसात हो रही है। क्षेत्र में अधिकतर गन्ना मिलों द्वारा स्थापित क्रय केंद्रों पर डाला जाता है। पहले क्रय केंद्रों पर लेबर ही गन्ने को ट्रक एवं ट्रॉला में भर्ती थी। लेबर से काम कराने पर खर्च अधिक आने के कारण प्रत्येक मिल ने गन्ना भरने के लिए लोडर लगा रखे हैं। मिल लोडरों को सीजन के लिए किराए पर ले लेती है। बार-बार बरसात होने से क्रय केंद्रों के प्लाटों में जलभराव हो जाता है। जिससे लोडर काम नहीं कर पाते हैं। एक बार बरसात होने के बाद एक सप्ताह तक तौल नहीं चलती है। जिससे तौल पिछड़ जाती है। पिछले तीन दिन हुई बरसात के कारण भी क्रय केंद्रों पर फिर से जलभराव हो गया। अधिकतर क्रय केंद्र जलमग्न हैं। वहीं, गांव कैली के कई किसानों का आरोप है कि एक सप्ताह से मिल इंडेंट ही नहीं भेज रहा है। अब बरसात के कारण एक सप्ताह तक तौल नहीं चल पाएगी। किसानों के अनुसार इस वर्ष मिलों के इस सुस्त रवैए एवं बार-बार बरसात होने से कुल बुआई का 60 प्रतिशत गेहूं की बुआई हो सकी है।