मृत घोषित था धोखाधड़ी का आरोपी, जिंदा निकला
- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन बेचने का मामला
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। फर्जी कागजातों के आधार पर जमीन बेचने से जुड़े पांच साल पुराने मामले में सिविल लाइन पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। वारदात के बाद मुख्य आरोपी ने परिजनों के साथ मिलकर खुद को मृत घोषित करा लिया था। कुछ दिन पहले पुलिस को आरोपी के जिंदा होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में एक महिला सहित पांच लोग पहले ही जेल जा चुके हैं।
गांव दौलतपुर निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य विजेंद्र सिंह नेहरा ने वर्ष 2016 में पत्नी मुनेश नेहरा के नाम से आठ बीघा जमीन खरीदी थी। यह जमीन जीत सिंह और हरी किशन निवासी छज्जूपुर परतापुर से ली गई थी। इसके लिए लगभग 30 लाख रुपये अदा किए गए। कुछ दिन बाद खुलासा हुआ कि जमीन बेचने वाले असली जीत सिंह और हरी सिंह नहीं थे। इसके बाद मुनेश की ओर से सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस पंजीकृत कराया गया। पुलिस ने तफ्तीश शुरू की और धोखाधड़ी के आरोप में ब्रह्म सिंह, कुलदीप, बंटी निवासी कायस्थ गांवड़ी थाना परतापुर के अलावा हरिओम शर्मा निवासी अंजौली थाना परतापुर और गाजियाबाद के मोदीनगर के रहने वाली गीता पत्नी निशिकांत को गिरफ्तार किया गया था। जीत सिंह और हरी किशन का किरदार निभाने वाले मुख्य आरोपी पुलिस पकड़ से दूर थे।
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नेत्रपाल ने जीत सिंह बनकर किया बैनामा
विवेचक एसआई रामकुमार ने बैनामों के आधार पर एक आरोपी का मोबाइल नंबर जुटाया और घर पहुंचे। पता चला कि आरोपी का मुख्य नाम नेत्रपाल है। उसे मृत बताया गया। उसने जीत सिंह बनकर बैनामा किया था। शक होने पर जांच आगे बढ़ाई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। नेत्रपाल जिंदा था और एक नए मोबाइल नंबर के साथ परिजनों से संपर्क में था। पुलिस ने घेराबंदी की और उसे पकड़ लिया।
दूसरे आरोपी की नहीं हुई पहचान
- मुनेश नेहरा के नाम जिन दो लोगों ने बैनामा किया था, उसमें एक हरी किशन था। उसका फोटो पुलिस के पास है, लेकिन अब तक यह पता नहीं चल सका कि हकीकत में वह कौन है और कहां छिपा है। अब पुलिस नेत्रपाल को रिमांड पर लेकर दूसरे आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।