इनका कहना है कि बरसात के समय हरी सब्जियों की उपज कम हो जाती है, खासकर बेल वाली सब्जियों के दाम भी बढ़ने शुरू हो जाते हैं। जो लौकी पिछले सप्ताह मंडी में 12 रुपये किलो थोक में बिक रही थी वह अब 20 से 40 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। इसी प्रकार करेला रुपये 8 से बढ़कर 15 रुपये प्रति किलो हो गया है। पत्ता गोभी जो 6 रुपये प्रति किलो थोक में बिक रही थी अब वह 10 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। तोरई ₹30 से बढ़कर ₹50 किलो थोक में बिक रही है।
इसी प्रकार भिंडी ₹20 किलो से बढ़कर 40 और ₹50 प्रति किलो थोक में हो गई है। मशरूम 50 से ₹60 प्रति किलो थोक में बिक रही थी वह मंगलवार को नवीन सब्जी मंडी में 80 से ₹90 किलो बिकी है। अदरक पिछले एक महीने से ₹300 किलो ही बिक रहा है। अगर इन सब्जियों के फुटकर रेट की बात करें तो प्रति किलो पर दोगुना मुनाफा लिया जा रहा है।
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बारिश का असर सब्जियों पर
सब्जी मंडी में चार दशक से सब्जी की बिक्री का कार्य करने वाले विक्रेताओं का कहना है कि बारिश से किसानों की सब्जियों की फसल पर असर हुआ है। बाजार में इस समय अधिकतम सब्जी बाहर की है।
लगातार बारिश से सब्जियों को बचाने में समस्या आती है, सब्जियां जल्दी खराब होने लगती हैं। बरसात के बाद सब्जी महंगी तो हर साल होती है, लेकिन लॉकल की लौकी, टमाटर तोरी, खीरा, धनिया, पुदिना इनमें महंगाई नहीं होती थी। इस बार खेत में खराब हो जाने से यह हालात बने हैं।
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मुजफ्फरनगर के साउथ सिविल लाईन की मनीषा सिंघल का कहना है कि 10 दिन पहले तक 50 रुपये की सब्जी में घर का पूरे दिन का काम चल जाता था, अब 200 रुपये में भी काम नहीं चल पा रहा है।
नईमंडी की आभा जैन का कहना है कि अचानक सब्जियों के दाम बढ गए हैं। सब्जी तो बाजार में बहुत आ रही है। लेकिन खरीदने में आम आदमी का दम ही निकल जाए। बरसात के बाद कुछ दाम बढ जाते थे पर इतनी महंगी पहली बार हुई है। 40 रुपये किलो से कम तो एक भी सब्जी नहीं है।