भारत सरकार की मंशा है कि देहात की जनता को प्रमाण पत्र और कृषि से जुड़ी सुविधाओं के लिए शहरों के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि गांव में ये सुविधाएं आसानी से मिल सके। इसके लिए सरकार ने हर गांव में सहकारी समिति खोलने का निर्णय लिया है। योजना को अमली जामा पहलाने के लिए जिला कोआपरेटिव डेवलपमेंट कमेटी गठित कर दी गई है। हालांकि योजना की पहली बैठक शुक्रवार को होनी थी, जो किन्हीं कारणों से स्थगित कर दी गई।
मेरठ जिले में सहकारिता विभाग की ओर से न्याय पंचायत स्तर पर 84 सहकारी समिति संचालित हैं। एक-एक समिति से कई-कई गांव जुड़े हैं। समितियों पर किसानों को खाद, बीज के अलावा कृषि यंत्रों की सुविधा भी मिलती है। लेकिन मत्स्य, पराग दुग्ध संघ, उद्यान विभाग, जनसुविधा केंद्र जैसी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता को गांव-गांव तक पहुंचाने और ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को सहकारिता से मिलने वाली सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत हर गांव में सहकारी समिति खोली जाएंगी। जिसमें मत्स्य पालन, पराग दुग्ध, कृषि, उद्यान विभाग समेत सहकारिता से जुड़े सभी विभाग गांव-गांव समितियां संचालित करेंगे। इनमें किसानों को खाद, बीज, जन्म-मृत्यु, आय-जाति, मूलनिवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, भूमि के अभिलेखों के साथ साथ अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।
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