क कार्यालय पर किसानों को दी गई जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
माछरा। खेत में समय से खरपतवार का प्रबंधन करने से पोषक तत्वों की कमी नही होगी और फसल का उत्पादन भी बढेगा। गेंहू की फसल में खरपतवार करीब 15 प्रतिशत नुकसान पहुंचाते है।
एडीओ कृषि राजकुमार ने ब्लॉक कार्यालय पर किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि गेंहू की फसल में दो प्रकार के खरपतवार होते हैं। एक चौडी पत्ती वाला तथा दूसरा पतली पत्ती वाला। संकरी पत्ती वाले खरपतवार जंगली जई, बथुआ, भांग, पालक, कृष्णा नील, चटटी, मैथा, आदि शामिल है। खरपतवार की वजह से उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत गिरावट आ सकती है। खरपतवार नाशी का प्रयोग हमेशा पहली सिंचाई के बाद खेत मे हल्की चिपचिपाहट हो तभी छिड़काव करना चाहिए। संकरी पत्ती घास मे क्लोडिना फाप 15 ईसी करे 400 मिली प्रति एकड और पिनेक्साडेन 5 ईसी को 400 मिली. प्रति एकड के हिसाब से छिडकाव करें। चोडी पत्ती वाले खरपतवार मे 214 डी इस्टर का 400 मिली. प्रति एकड मेँ प्रयोग कर छिडकाव करें।