उन्होंने कहा कि मिट्टी के काम करने वालों को पट्टे आवंटित किए जाएं। ग्राम प्रधानों को भी इस संबंध में सूचित कर दिया जाए। माटी कला से जुडे़ ऐसे लोग जिनके पास आवास नहीं हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराए जाए।
माटी कला से जुडे़ लोगों की समिति बनाई जाए। माटी कला का कार्य करने वालों लोगों को आवंटित पट्टों को चकबंदी से बाहर रखा जाएगा। सभी सरकारी विभागों में आयोजित बैठकों आदि में प्लास्टिक का प्रयोग न किया जाए। पीने के पानी व चाय के लिए कुल्हड़ का प्रयोग करें।
उन्होंने कहा कि मिट्टी में 26 पोषक तत्व मौजूद होते हैं। अगर हम मिट्टी से बने बर्तनों का प्रयोग करेंगे तो हमारा स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। संपूर्ण समाधान दिवस पर मिट्टी के बर्तनों को एक टेबल पर रखवाने की व्यवस्था कराई जाए।
जनपद में एक दुकान ऐसी हो, जिसमें मिट्टी के बर्तन को रखा जाए, ताकि कोई भी वहां से इन्हें खरीद सके। उन्होंने कहा कि भविष्य में रोडवेज बस स्टैंड पर भी एक दुकान में मिट्टी के बर्तन प्रदर्शित किए जाने का प्रयास है। उन्होने बताया कि प्रदेश में 2300 माटी कला का कार्य करने वाले लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।