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यूपी: खेल-खेल में गई 'जिगर के टुकड़ों' की जान, पूरे गांव में पसरा मातम

Sun, 22 Jul 2018 10:30 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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फाइल फोटो
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घर से खेलने के लिए निकले दो जिगर के टुकड़े मौत के आगोश में समा गए। दोनों बच्चों की मौत से पूरे गांव में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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घटना उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद की है। छुटमलपुर में घर से खेलने निकले दो बच्चे यूपी और उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों के बीच से बहने वाली सोलानी नदी में डूब कर मौत के आगोश में समा गए। जिगर के टुकड़ों की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है। पूरे गांव में मातम का माहौल है। शुक्रवार को परिजनों ने बिना कोई कानूनी कार्रवाई किए गमगीन माहौल में बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया। 

थाना फतेहपुर क्षेत्र के गांव भैंसराऊ निवासी नौ वर्षीय प्रियांशु पुत्र पिन्टू और उसका दोस्त 8 वर्षीय आर्यन पुत्र विश्वास उर्फ बिट्टू सैनी बृहस्पतिवार की शाम चार बजे स्कूल से आने के बाद घर से खेलने के लिए निकले थे। देर शाम तक भी जब वे घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। काफी तलाश के बाद भी बच्चों का कुछ पता नहीं चल सका तो पुलिस को भी सूचना दी गई। ग्रामीण टोलियां बना कर बच्चों की खोज में निकले। आर्यन की मां भी गांव की कुछ महिलाओं के साथ उसे तलाश करने के लिए नदी की तरफ निकली तो एक भैंसा बुग्गी चालक ने सोलानी नदी के पास बच्चे के कुछ कपड़े पड़े होने की बात उन्हें बताई। मौके पर पहुंचने पर पाया कि कपड़े आर्यन के हैं।
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इसके बाद गांव में खबर की गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। इसके बाद गांव से गोताखोर बुलाए गए। तीन घंटे की मशक्कत के बाद रात 11 बजे दोनों बच्चों के शव सोलानी नदी में बने पानी के कुंड से बरामद हो गए। शव मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। रात में शव गांव लाए गए।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सूचना पर पुलिस गांव पहुंची और परिजनों के अनुरोध के बाद शवों का पंचनामा भर कर उन्हें बिना कार्रवाई के परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद शुक्रवार को बेहद गमगीन माहौल में दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

इकलौता पुत्र था आर्यन
आठ साल का आर्यन अपने माता पिता का इकलौता पुत्र था। उससे बड़ी उसकी एक दस साल की बहन है। आर्यन की मौत के बाद परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था। उसकी मां बार बार उसे याद करके बेसुध हुई जा रही थी। परिजन उस घड़ी को कोस रहे थे जब वह खेलने के लिए घर से निकला था। दो बच्चों की मौत के बाद गांव में चूल्हा तक नहीं जला।

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