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UP: गणित में अब पढ़ेंगे रोबोटिक्स, कोडिंग थ्योरी जैसे कोर्स, जल्द मिलेगा प्रवेश

Sun, 05 Jun 2022 01:55 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पीजी में भी लागू की जा रही है। सीसीएसयू कैंपस में शनिवार को हुई गणित विभाग में बोर्ड ऑफ स्ट्डीज की बैठक में कई निर्णयों पर मुहर लगी है।  
 
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CCSU - फोटो : Amar Ujala Meerut
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विस्तार
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गणित में अब पीजी और पीएचडी में छात्र-छात्राएं रोबोटिक्स, डाटा स्ट्रक्चर, कोडिंग थ्योरी, ग्रामीण लैंग्वेज, मैथमेटिकल क्रिप्टोग्राफी जैसे विषय पढ़ेंगे। वैदिक मैथमेटिक्स को अन्य विभाग के लिए भी तैयार किया गया है। शनिवार को सीसीएसयू के गणित विभाग में हुई बोर्ड ऑफ स्ट्डीज की बैठक में इन निर्णयों पर मुहर लगाई गई। 

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कन्वीनर गणित विभागाध्यक्ष प्रो. शिवराज सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पीजी में भी लागू की जा रही है। नए सिलेबस के मुताबिक अगर कोई छात्र-छात्रा एमएससी प्रथम वर्ष पूर्ण करने के बाद पढ़ाई छोड़ देता है तो उसे बीएससी रिसर्च की उपाधि मिलेगी। वित्त वर्ष पूर्ण करने पर एमएससी गणित की उपाधि प्रदान की जाएगी।

 

संपूर्ण पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के स्नातक पाठ्यक्रम से जोड़कर संशोधित किया गया है। कोर कंपलसरी, इलेक्टिव-माइनर, वेल्यू एडेड कोर्सों को तैयार किया गया है। एनसीईआरटी के गणित विषय के पाठ्यक्रम के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारण करने की समिति के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष प्रो. शिवराज सिंह का कहना है कि गणितीय शिक्षा को कंप्यूटेशनल थिंकिंग से जोड़ने के जो प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे हैं, उसी के अनुरूप विवि के पाठ्यक्रम निर्धारित करने की आवश्यकता है। 

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इसी के अनुसार पाठ्यक्रम में रोबोटिक्स, डाटा स्ट्रक्चर, कोडिंग थ्योरी, ग्रामीण लैंग्वेज मैथमेटिकल क्रिप्टोग्राफी जैसे विषयों को जोड़ा गया। दूसरी फैकल्टी के लिए आवश्यक माइनर कोर्स व वैल्यू एडेड कोर्स भी पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं।
 
वैदिक मैथमेटिक्स को अन्य विभाग के लिए तैयार किया गया। अब इसे दूसरे छात्र-छात्राएं भी पढ़ सकेंगे। इसके साथ प्री पीएचडी कोर्स वर्क के पाठ्यक्रम को भी संशोधित किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रथम सेमेस्टर के कोर्स कंपलसरी किए गए हैं। अन्य सभी सेमेस्टर में विद्यार्थियों को इलेक्टिव कोर्स चयन करने का विकल्प मिलेगा। सभी सेमेस्टर में प्रोजेक्ट वर्क करना जरूरी होगा। 

बैठक में कन्वीनर डॉ. नरोत्तम, बोर्ड ऑफ स्ट्डीज में संकायाध्यक्ष प्रो. मृदुल गुप्ता, आईआईटी रुड़की के प्रो. प्रकाश शर्मा, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विवि के प्रो. रमेश चंद्र डिमरी, गणित विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. दिवाकर पांडे, प्रो. जयमाला, डॉ. अनिरुद्ध भार्गव एवं मदन पाल मौजूद रहे।
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तकनीकी कोर्सों में लड़कियों की संख्या बढ़ाने पर दिया जोर 
 तकनीकी कोर्सों में लड़कियों की संख्या बढ़ाने के लिए सीसीएसयू ने कवायद शुरू कर दी है। इसको लेकर प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला ने शनिवार को बृहस्पति भवन में सभी विभागाध्यक्षों, कोआर्डिनेटरों और महिला शिक्षिकाओं के साथ बैठक की। 

शासन ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों से कहा कि प्रदेश के तकनीकी कॉलेजों में लड़कियों की संख्या 28.4 फीसदी ही है। ये संख्या दूसरे राज्यों की तुलना में कम है। ऐसे में सभी विवि के कुलपति से कहा गया है कि तकनीकी कोर्सों में लड़कियों की संख्या बढ़ाने को रोड मैप तैयार करें। 

सीसीएसयू की बात करें तो हर साल लड़कियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले तीन साल से डिग्री लेने में लड़कियों की संख्या 65 फीसदी है। हालांकि तकनीकी-प्रोफेशनल कोर्सों में लड़कियों की संख्या घट रही है। बीटेक, एलएलबी, बीबीए, बीसीए, एमबीए, एमसीए, बीएससी एजी जैसे कोर्सों में लड़कियां ज्यादा रुचि नहीं लेती हैं। 

इन कोर्सों में लड़कियों की रुचि बढ़ाने को प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला ने सभी महिला शिक्षिकाओं, विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। सुझाव दिए गए कि लड़कियों को सरकार द्वारा चलाई जा रहीं स्कॉलरशिप योजनाओं की जानकारी दी जाए। गर्ल्स इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेजों में जाकर कैंपस के कोर्सों के बारे में बताया जाए। उनके एजुकेशन टूर कैंपस में आमंत्रित किए जाएं। 

ये भी सुझाव दिया गया कि लड़कियों को तकनीकी कोर्सों में फीस में कुछ छूट दी जा सकती है क्या। पूरा रोड मैप कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के निर्देशन में जल्द ही फाइनल कर दिया जाएगा।

सम सेमेस्टर के परीक्षा फार्म भरे जाने की अंतिम तिथि आज 
सीसीएसयू कैंपस और कॉलेजों में सम सेमेस्टर के परीक्षा फार्म भरने का रविवार को अंतिम दिन है। विवि दो बार परीक्षा फार्म भरने की तिथि बढ़ा चुका है, इस बार ये अंतिम मौका है। विवि प्रशासन का कहना है कि रविवार को परीक्षा फार्म भर दें, इसके बाद पोर्टल बंद हो जाएगा। सम सेमेस्टर की परीक्षाएं जल्द प्रस्तावित हैं।  
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