मलबे से निकाली गई महिला।
- फोटो : अमर उजाला
किसी भी हादसे में किसी का दुनिया से यूं चले जाना कभी भी अच्छा नहीं माना जा सकता। रात के करीब डेढ़ बजे तक हादसे में पांच लोगों की मौत हो चुकी थी। मलबे से ज्यादातर लोग लाश बनकर निकल रहे थे। वहां चीखों पुकार मची हुई थी। लोग अपनों के लिए रो रहे थे। उनके अपने जो मलबे में जिंदा दफन हो गए थे, उनकी सलामती के लिए रो-रोकर दुआएं मांग रहे थे। राहत और बचाव दल के लोगों से मिन्नतें कर रहे थे कि कुछ भी करके उनके अपनों को जिंदा व हिफाजत के साथ निकाल लें। जैसे-जैसे रात चढ़ रही थी, वैसे वैसे लोगों की उम्मीद की डोर नाजुक होती जा रही थी।