विकासपुरी में मौर्यकालीन टीले पर अवैध कब्जा कर लगाया गेट।
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मेरठ में विकासपुरी बिजलीघर के पास पुरातात्विक महत्व के मौर्यकालीन टीले पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने 27 सितंबर को इस टीले की खोज करते हुए दावा किया था कि यहां दो हजार साल पुरानी ईंट और मौर्यकालीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं।
आवास एवं विकास परिषद ने सन 1976 में लिसाड़ीगेट क्षेत्र में विकासपुरी कॉलोनी विकसित की थी। कॉलोनी में करीब 45 सालों से बिजलीघर के पीछे कमेला रोड से सटे खसरा नंबर-3831 की करीब 1000 वर्ग मीटर का ऊंची जमीन खाली पड़ी थी। 27 सितंबर को इस ऊंचे टीले पर पुरातत्व विभाग ने इस मौर्यकाल के टीले के खोजे जाने का दावा किया तो कॉलोनी के लोग आश्चर्यचकित रह गए। टीले से मौर्यकाल के मिट्टी के बर्तन, पत्थर, ईंट व अन्य सामग्री मिली थीं। इस पर पुरातत्व विभाग का शोध भी जारी है।
वहीं पुरातत्व विभाग ने जिला प्रशासन को संरक्षित करने के लिए पत्र लिखा। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले का संज्ञान नहीं लिया, इसी बीच कुछ लोगों ने टीले की चहारदीवारी करानी शुरू कर दी। एक सप्ताह पहले स्थानीय लोगों ने मामले की शिकायत लिसाड़ीगेट थाना, सीओ कोतवाली, जिला प्रशासन व आवास एवं विकास परषिद में की, तो अधिकारी हरकत में आए। जिला प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और मामले में निर्माण रुकवाने के निर्देश दिए। जिसके बाद निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। लेकिन तब तक जमीन पर तीन गेट व दीवार का काम काफी हद तक पूरा करा दिया। स्थानीय लोग दीवार व जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग कर रहे हैं।
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कब्जामुक्त कराएंगे
मामला संज्ञान में है, खसरा नंबर-3831 की जमीन की जांच चल रही है। नक्शे व अन्य सबूतों के अनुसार जमीन का स्वामित्व आवास विकास ही होगा। लेकिन मामले में लेखपाल से पूरी रिपार्ट के आने के बाद जमीन को कब्जामुक्त कराई जाएगी।
- नीरज कुमार, अधिशासी अभियंता आवास एवं विकास परिषद
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