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पश्चिमी यूपी में हर दूसरे दिन कत्लेआम... आंकड़े देख उड़े पुलिस अफसरों के होश

Tue, 25 Sep 2018 02:40 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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अपराध भले ही रोके नहीं जा सकते, लेकिन कम किए जा सकते हैं। कानून का खौफ ही इसका सबसे कारगर तरीका होता है। वेस्ट यूपी के कुछ जिलों मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत और बिजनौर में कत्ल करना आम हो चला है। बात बे-बात पर बेखौफ होकर लाशें गिराई जा रही हैं। इसे देखकर नहीं लगता कि समाज में कानून का खौफ बाकी है। ज्यादातर वारदातें जिंदगी का किस्सा खत्म करने के लिए ही हुई हैं। हालात चुगली कर रहे हैं कि हत्या सबसे सुलभ अपराध बन चुका है और इनसे फैलने वाली दहशत भी कहीं न कहीं कानून की चौखट का रास्ता तंग कर रही है। जेल से लेकर सड़क तक और घर से लेकर जंगल तक कातिलों का खौफ है। 

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सवाल उठ रहा है कि आखिर कत्ल जैसा जघन्य अपराध इतना आसान क्यों हो गया? क्या वाकई अपराधी जान की कीमत पर अपने खिलाफ खुलने वाली आवाज को खत्म कर रहे हैं? ऐसा माहौल तब उभरा है, जब पुलिस बदमाशों के दनादन एनकाउंटर कर रही है। तीन माह में हुई हत्याओं के पीछे जो कारण उभरे हैं, वे बड़े चौंकाने वाले हैं। सवाल भी उठाते हैं कि क्या इन वजहों से किसी की जान भी ली जा सकती है? हालांकि ये अभी विवेचना का हिस्सा हैं लेकिन जो भी हो, मकसद केवल एक ही है- जिंदगी खत्म करना। दुष्कर्म के बाद हत्या, शराब के नशे में हत्या, अवैध संबंधों में कत्ल, मान-सम्मान को ठेस पहुंची तो मार दिया और प्रेम प्रसंग में बाधक होने के शक में भी कत्ल। तौर तरीके भी बड़े अजीबो गरीब रहे हैं- गोली, चाकू और गला घोटकर मार डालना आम है, लेकिन पत्थरों से पीटकर हत्या, जहर देकर मार डालना, फिरौती मांगने और मिलने से पहले ही मार डालने की घटनाएं भी तीन महीने में हुई हैं। इनमें हालांकि परंपरागत तौर तरीके का ही इस्तेमाल किया गया, लेकिन उद्देश्य सिर्फ कत्ल करना ही रहा है।

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मेरठ डेढ़ गुणा बढ़ीं हत्याएं
मेरठ में छह माह के अंतराल में पिछले साल की अपेक्षा हत्या का ग्राफ डेढ़ गुणा बढ़ा है। लूट, डकैती, दुष्कर्म, अपहरण और छेड़छाड़ की घटनाओं में हालांकि गिरावट आई है। पुलिस बदमाशों के एनकाउंटर से कानून व्यवस्था बेहतर होने का दावा कर रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मार्च से 31 अगस्त 2018 तक जिले में 40 लोगों की हत्या, 135 दुष्कर्म, 302 महिलाओं के अपहरण, 320 छेड़छाड़ के मुकदमे दर्ज हुए हैं। पिछले साल इस अवधि में 35 हत्या, 142 दुष्कर्म, 321 अपहरण और 358 छेड़खानी में मुकदमे थे। विवेचना में यह बात सामने आई कि हत्या की अधिकांश वारदातें अपनों के द्वारा रंजिश या फिर अवैध संबंधों के चलते की गई। कुछ कत्ल मुकदमेबाजी के चक्कर में भी हुए। बसपा नेता के पिता मेहरचंद कसाना की हत्या का खुलासा होना अभी बाकी है। 

सहारनपुर अब तक 44
सहारनपुर में लूट, रंजिश और अवैध संबंधों के कारण हत्या करने से लोग पीछे नहीं हट रहे हैं। जनवरी से अब तक सहारनपुर में 44 हत्याएं हो चुकीं हैं। 15 मार्च से अब तक 36 कत्ल दर्ज हुए। बड़गांव में सुभाष और सरसावा में उस्मान की हत्याएं अपहरण के बाद हुई। दोनों मामलों में फिरौती मांगी गई लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। हालांकि पुलिस रिकार्ड में अपहरण के लगभग 100 मामले दर्ज हैं, लेकिन इनमें फिरौती के लिए एक भी नहीं है। यह बात अलग है कि पुलिस ने दोनों घटनाओं में आरोपी रहे दो बदमाशों ओमपाल और विक्की को मुठभेड़ में मार गिराया और हत्या के अधिकांश मामलों को पुलिस  ने खोलने का दावा किया, लेकिन नौ मामलों का खुलासा शेष है। पुलिस विवेचना में यह बात उभर रही है कि अधिकांश मामलों में आरोपियों का मकसद सिर्फ कत्ल करना रहा। डीआईजी शरद सचान का कहना है कि संगीन अपराधों में पहले के मुकाबले कमी आई हैं। हत्या की वारदातें लूट, रंजिश और अवैध संबंधों को लेकर सबसे ज्यादा हुई हैं।

मुजफ्फरनगर मूंछों की है लड़ाई 
मुजफ्फरनगर में क्राइम कैपिटल कहे जाने वाले इस जिले में लूट, डकैती, रोड होल्डअप जैसे गंभीर अपराधों पर तो अंकुश लगा, मगर हत्याओं पर नहीं। छह माह में लूट, डकैती का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ, जबकि 29 हत्याएं हुई। इनमें पांच हत्याएं दलितों की हुई, जिसमें एक युवती भी है। अधिकांश में अनैतिक संबंध, प्रेम प्रसंग और पारिवारिक विवाद सामने आए। तितावी के बुढ़ीना कलां में दलित युवती सीमा को प्रेम प्रसंग में बाधक होने के शक में गोली मारी गई। बघरा में दलित अंकित की हत्या चोरी के शक में हुई। बुढ़ाना में दलित कपिल को पैसों के लेनदेन में साथियों ने मार डाला। पुरकाजी के मांडला में दलित छात्र रजत की हत्या का केस अभी अनसुलझा है। शाहपुर के गांव कुटबा में रक्षा विभाग के कर्मचारी मनोज शर्मा को दूसरे समाज की युवती से प्रेम विवाह करने पर जान देनी पड़ी। बागोवाली में जाहिदा की हत्या उसके भाई मुनव्वर ने ही कर दी, क्योंकि वह पुत्रवधू से अवैध संबंध का विरोध करती थी। भोपा में सुंदर ने अपनी बेटी तनु की हत्या प्रेम प्रसंग के चलते कर दी थी। तितावी के साल्हाहेडी में छोटे भाईयों ने बड़े भाई मनोज की हत्या भी इसलिए कर दी थी कि उसकी बेटी ने प्रेम विवाह कर लिया था। मीरापुर के सिकंदरपुर में सुलेमान की हत्या उसके बेटों ने, तितावी के गांव करवाडा में पूर्व प्रधान शिक्षा की हत्या बेटे ने, रतनपुरी के सिकंदरपुर में सपना की हत्या पति ने और मंसूरपुर के बोपाड़ा में पूनम की हत्या पति ने ही की।

शामली  मामूली बातों पर खून
शामली में बीते डेढ़ माह में हत्या की पांच वारदातें हुईं और इनके पीछे मामूली बातें कत्ल की वजह बनी हैं। शराब पीने के दौरान थानाभवन में युवक ने साथी कांवड़िए को कांच की बोतल तोड़कर पेट में घोपकर मार डाला था। बाबरी थाना के गांव गोगवान जलालपुर में पैसों के लेनदेन पर युवक की हत्या हुई। छात्र वर्चस्व की लड़ाई में कांधला में डूंगर (फुगाना) के छात्र प्रियांशु की गोली मारकर हत्या की गई। कांधला के मोहल्ला खैल निवासी नाजिम को सोते समय मौत के घाट उतारा गया। शामली नया जिला है और मुजफ्फरनगर जिले से अलग हुआ है, लेकिन अपराध का ट्रेंड यहां मुजफ्फरनगर से अलग नहीं है। हत्याओं को छोड़ दें तो यहां बाकी अपराधों में सीमावर्ती हरियाणा का भी प्रभाव रहता है, लेकिन हत्या की वारदातों में कोई प्लानिंग सामने नहीं आई। पुलिस ने एक को छोड़कर बाकी वारदातों का खुलासा कर दिया है।

बागपत अपराधियों में ही होड़
बागपत में खेती और खेल से दुनिया में पहचान बनाने वाले बागपत में अपराधी ही एक दूसरे के खून के प्यासे हैं। इस साल अब तक 50 हत्याएं हो चुकी हैं। जेल के भीतर नौ जुलाई को मुन्ना बजरंगी की सनसनीखेज हत्या तो अभी तक देश भर में सुर्खियों में है। मुकारी गांव के मासूम प्रिंस की हत्या भी लोग नहीं भूले। महिलाओं पर अपराध भी कम नहीं हुए। अपहरण की धाराओं में दर्ज 101 मामले सामने आए हैं। एसपी शैलेश पांडेय का कहना है कि जिले में अधिकतर हत्या के मामलों में रंजिश या फिर प्रेम प्रसंग कारण रहा है। लूट के विरोध पर भी एक या दो हत्याएं हुई। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड़ की जांच चल रही है। सुपारी, रंजिश या साजिश  के बिंदु जांच में शामिल हैं। रंगदारी मांगने के कई मामले सामने आए हैं। जिले में लूट की 27 और चोरी की 247 वारदातों के अलावा बलात्कार की भी 20 घटनाएं पुलिस रिकार्ड में दर्ज हो चुकी हैं। 

बिजनौर अपराधी भी बने शिकार
बिजनौर में कत्ल यहां भी कम नहीं हैं, अलबत्ता एक बात अलग है कि कत्ल करने वाले भी खुद कत्ल हुए हैं। पिछले छह माह में 45 हत्याएं हुई हैं। घटनाओं का खुलासा हुआ, लेकिन घटनाएं नहीं रूक रही हैं। इनके पीछे रंजिश या अवैध संबंधों की कहानी हैं। हालांकि ये सिर्फ कारण हैं, मकसद तो सिर्फ कत्ल करना ही है। दहेज के लिए 20 महिलाओं हत्या अलग है। महिला गैंगस्टर पूजा को भी चाकूओं से गोदकर मारा गया। उसने नहटौर के पूर्व सीएमओ एसके भटनागर के यहां 2015 में सद्दाम गैंग के साथ डाका डाला था और अब अपना गैंग चला रही थी। जिले में किसी बदमाश का इस साल एनकाउंटर नहीं हुआ है। नजीबाबाद पुलिस ने दस हजार के इनामी बदमाश शमशाद, फैसल व नौशाद को मुठभेड़ के दौरान दबोचा था। दोनों के पैर में गोली लगी थी। जिले में फरवरी से अब तक हत्या की 45 वारदातें हो चुकी हैं। जबकि लूट के 41 मामले दर्ज हैं। अवैध संबंधों और रंजिश के कारण ज्यादातर हत्याएं हुई हैं। अधिकांश हत्याएं गला घोंटकर या तमंचे से गोली मारकर की गई हैं। कई जगह शराब पिलाने के बाद गला घोंटकर हत्या करने के मामले सामने आए हैं। दहेज हत्या गला घोंटकर या जलाकर की गई हैं।
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कानून व्यवस्था बेहतर  
मुठभेड़ में बदमाशों को पुलिस जवाब दे रही है। योगी सरकार में मेरठ जोन के जिलों में कानून व्यवस्था भी बेहतर हुई हैं। अपराध का ग्राफ तेजी से घटा हैं। रंजिश और अवैध संबंधों में ज्यादा हत्या हुई है। -प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन

बढ़ता तनाव और नशा है कारण
हत्या जैसी आपराधिक वारदातों के बढ़ने के दो कारण हैं। पहला तनाव, गला काट प्रतिस्पर्धा और दूसरा बढ़ता हुआ नशा। इन हालात में लोग खुद पर नियंत्रण खो रहे हैं। खत्म हो जाता है और वह आपराधिक वारदात आसानी से कर पाता है। नशे से दूर रहकर और तनाव कर इस तरह की घटनाओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। -डॉ. रवि राणा, वरिष्ठ मनोचिकित्सक।

सामाजिक परिवेश है जिम्मेदार
हत्या करने वालों के व्यवहार में आपराधिक प्रवृत्ति शामिल होती है। हम बच्चों कैसे संस्कार दे रहे हैं? कैसे परिवेश में परवरिश कर रहे हैं? एकल जीवन शैली ने आपराधिक प्रवृत्ति व सामाजिक दशा को बदला है। जैसा परिवेश, वैसा व्यवहार होता जा रहा है। -प्रोफेसर योगेंद्र सिंह, समाजशास्त्र विभाग, सीसीएसयू।

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