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यूपी : ऑक्सीजन की कमी से उद्योगों को करोड़ों का घाटा, केवल दस प्रतिशत हुई आपूर्ति

Wed, 02 Jun 2021 12:08 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

14 अप्रैल से 31 मई तक लॉकडाउन के कारण मेरठ की एमएसएमई को सीधा 150 करोड़ का नुकसान हुआ है। कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पाया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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केंद्र और प्रदेश सरकार के आदेश के बाद अभी इंडस्ट्री को ऑक्सीजन निर्माण की 10 प्रतिशत ही ऑक्सीजन प्राप्त हो रही है। एमएसएमई में फर्नेस चलाने के लिए स्टील, एल्यूमोनियम, कोपर आदि का कार्य प्रभावित होने के चलते 14 अप्रैल से अब तक उद्यमियों को करोड़ों रुपये का घाटा हो चुका है। इसके साथ ही कच्चे माल की आपूर्ति, लेबर का उपलब्ध न होना और मार्केट में डिमांड खत्म होने के समस्या से भी उद्योग जूझ रहे हैं।

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मेरठ के विभिन्न ऑक्सीजन रिफिलिंग प्लांट में ऑक्सीजन की आपूर्ति आईनोक्स मोदीनगर, गोयल एमजी गैस गाजियाबाद के द्वारा की जाती है। यहां विभिन्न गैस सप्यार्स के पास कैप्सूल में गैस पहुंचती है जिसे प्लांट में स्टोर कर छोटे सिलिंडरों के माध्यम से सप्लाई किया जाता है।

अब मेरठ का माहेश्वरी ऑक्सीजन प्लांट भी गैस निर्माण कर रहा है। प्रतिदिन यहां 1 हजार तक गैस सिलेंडकर का निर्माण होने का आईआईए ने दावा किया है। मिनिस्ट्री ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के द्वारा जारी किए गए आदेशानुसार अब इंडस्ट्री को गैस उपलब्ध कराने की छूट दे दी गई है। गाजियाबाद और मोदीनगर के सप्लायर्स का दावा है कि वे लोग अभी 55.82 प्रतिशत ही आक्सीजन इंडस्ट्री को सप्लाई कर पा रहे हैं।

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आईआईए के अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल ने बताया कि इंडस्ट्री को वर्तमान में लगभग 5 हजार सिलेंडर की आवश्यकता है। इंडस्ट्री को केंद्र एवं प्रदेश सरकार के आदेश के बाद भी 10 प्रतिशत ही ऑक्सीजन प्राप्त हो रही है। शहर में 700 डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रूप से ऑक्सीजन की कमी से प्रभावित हैं।

प्रदेश में लगभग 9 हजार से अधिक बड़े उद्योग जिन्हें आक्सीजन की तुरंत आवश्यकता है। व्यवस्था बनने में भी अभी 15 से 20 दिन का अतिरिक्त समय लगेगा। महामारी से आक्सीजन निर्माण का 80 फीसदी इंडस्ट्री में प्रयोग होता था और 20 प्रतिशत अस्पतालों में प्रयोग किया जाता रहा है। महामारी में 100 प्रतिशत सप्लाई हॉस्पिटल को दी गई। 

 प्रोडक्टर में आई 60 फीसदी गिरावट
 वेस्टर्न यूपी चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष रामकुमार गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2020 से 2021 मई तक शहर की 500 यूनिट का कारोबार 60 फीसदी रह गया है। 14 अप्रैल से 31 मई तक लॉकडाउन के कारण मेरठ की एमएसएमई को सीधा 150 करोड़ का नुकसान हुआ है। कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो रहा है। लेबर फैक्ट्री में आने के लिए तैयार नहीं है। मार्केट से डिमांड न आने के कारण सप्लाई भी प्रभावित है। 
 
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रोडवेज चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष रवि प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि एमएमएमई 50 प्रतिशत स्टॉफ में संचालित हैं। ऐसे में उद्यमी को खर्चे निकालने भी मुश्किल हो गए हैं। डिस्ट्रिब्यूटर्स और डीलर्स ने वर्ष 2020 तक की पेमेंट नहीं दी है। इंडस्ट्री में माल डंप होने के कारण बहुत से चीजों के रेट नीचे आ गए हैं। लॉकडाउन से पूर्व ही बिलिंग पर अब डिस्ट्रिब्यूटर डिस्काउंट मांग रहे हैं।
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