2017 में यह रहा हार-जीत का अंतर:
शहर: 28820
दक्षिण: 35395
कैंट: 76618
हस्तिनापुर: 36045
किठौर: 10800
सरधना: 21595
सिवालखास: 11407
मतदान प्रतिशत से भी प्रभावित होंगे नतीजे
मतदाताओं की खामोशी से मतदान का असर मतदान प्रतिशत पर भी पड़ सकता है। 2017 में जिले की सातों सीटों पर औसत 66.89 प्रतिशत मतदान हुआ था। जानकारों का मानना है कि मतदान प्रतिशत का भी नतीजों से सीधा संबंध है।
2017 में कहां कितना हुआ मतदान:
मेरठ दक्षिण: 63.14
मेरठ शहर: 64.69
मेरठ कैंट: 58.96
सरधना: 71.83
हस्तिनापुर: 67.76
सिवालखास: 70.71
किठौर: 71.70
जिले में कुल मतदान 66.89
मतदाताओं के मन में चल रहा द्वंद
जब मतदाता मतदान की तारीख तक खामोश रहता है तो उसके अंदर राजनीतिक दलों के मुद्दों विकास, सामाजिक सुरक्षा और क्षेत्रवाद, जातिवाद और धर्म व संप्रदाय को लेकर द्वंद चलता रहता है। वह यह तय नहीं पाता कि किसकी तरफ जाए। ऐसे में वह मतदान के दिन ही अपना निर्णय लेता है। वर्चुअल प्रचार की वजह से भी इस बार मतदाता खामोश है। -प्रो. पवन कुमार,विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान, चौधरी मेरठ
ईवीएम पर ही टूटेगी ये खामोशी
वोटरों की खामोशी का मतलब है कि मतदाताओं ने अपना मन बना लिया है। मतदाता सरकार के पांच साल के कार्यकाल को भी देखता है और उसे व्यक्तिगत रूप से व समाज को क्या मिला है वह इसका भी आकलन करता है। ऐसे में मतदाता ईवीएम पर ही अपनी चुप्पी तोड़ता है। -प्रो. पूरन सिंह उज्जवल, राजनीति विज्ञान, मेरठ कालेज मेरठ