विधानसभा चुनाव 2022 बिगुल बज गया है। चुनाव की तारीखों का एलान हो गया है। मेरठ में पहले फेज में 10 फरवरी को मतदान है, यानी महज एक माह बचा है। अब सपा में टिकटों को लेकर घमासान होगा। एक-एक सीट से कई-कई दावेदार हैं। टिकट के दावेदारों को रालोद गठबंधन को लेकर भी असमंजस है, क्योंकि रालोद के खाते में दो सीटें जाएंगी। कयास है कि सिवालखास और मेरठ कैंट, ये दो सीटें रालोद के खाते में जाएंगी।
2017 विधानसभा चुनाव में सपा मेरठ जिले की सात में से शहर की एक विधानसभा सीट ही जीत पाई थी। मेरठ दक्षिण और मेरठ कैंट सीट गठबंधन में कांग्रेस के पास थी, जबकि अन्य चार सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा था। शहर से विधायक रफीक अंसारी एकमात्र जीते थे, इसलिए उनकी दावेदारी इस बार भी मजबूत है। इस बार सपा के दिग्गज जो अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश करेंगे, उनमें हस्तिनापुर सीट से दो बार जीत चुके प्रभुदयाल वाल्मीकि, तीन बार किठौर से जीते पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर और सिवालखास से विधायक रह चुके गुलाम मोहम्मद प्रमुख हैं। सरधना से अतुल प्रधान पिछला चुनाव हार गए थे, लेकिन पार्टी मुखिया अखिलेश यादव के करीबी होने के कारण फिर से टिकट के लिए दावेदारी की है। दक्षिण सीट से महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी और बसपा से आए योगेश वर्मा का नाम भी चल रहा है।
सपा में टिकट को लेकर सबसे ज्यादा घमासान हस्तिनापुर सीट को लेकर होने की संभावना है। यहां से मुख्य तौर पर पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि, योगेश वर्मा, विपिन मनोठिया और प्रशांत गौतम दावेदार हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर खेमा यहां से प्रशांत गौतम के टिकट चाहता है, जबकि अतुल प्रधान, योगेश वर्मा के पक्ष में हैं। सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, विपिन मनोठिया के लिए प्रयासरत हैं।
यह भी पढ़ें: कौन है जावेद हबीब: लंदन तक पहुंचे... पर अपने ही इलाके में फंस गए, थामा था भाजपा का दामन, खूब प्रसिद्ध है परिवार