सरधना सीट
इस सीट पर 2017 में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। भाजपा के संगीत सोम दूसरी बार जीते थे। उन्होंने सपा के अतुल प्रधान को 21625 मतों से हराया था। बसपा से इमरान कुरैशी भी मजबूती से लड़े थे। इस बार भी संगीत सोम और अतुल प्रधान का फिर से मुकाबला बताया जा रहा है। अतुल, सपा- रालोद गठबंधन के प्रत्याशी हैं।
प्रत्याशी पार्टी मत
संगीत सोम भाजपा 97921
अतुल प्रधान सपा 76296
इमरान कुरैशी बसपा 57239
मेरठ दक्षिण सीट
2017 में भाजपा के सोमेंद्र तोमर और बसपा के याकूब कुरैशी व सपा- कांग्रेस गठबंधन के आजाद सैफी में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। सोमेंद्र तोमर 35359 के अंतर से जीते थे। इस बार सोमेंद्र का सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी आदिल चौधरी से मुकाबले के आसार हैं।
प्रत्याशी पार्टी मत
सोमेंद्र तोमर भाजपा 113086
याकूब कुरैशी बसपा 77727
आजाद सैफी कांग्रेस 69076
किठौर सीट
2017 में इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला था। यहां से भाजपा के सत्यवीर त्यागी 10822 मतों से विजयी हुए थे। उन्होंने सपा के शाहिद मंजूर को हराया था, बसपा के गजराज नागर भी मजबूती से लड़े थे। एक बार फिर सत्यवीर त्यागी का मुकाबला शाहिद मंजूर से हैं। इस बार शाहिद मंजूर, सपा- रालोद गठबंधन के प्रत्याशी हैं।
प्रत्याशी पार्टी मत
सत्यवीर त्यागी भाजपा 90622
शाहिद मंजूर सपा 79800
गजराज नागर बसपा 62503
हस्तिनापुर सीट
2017 में इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। यहां भाजपा के दिनेश खटीक 36062 वोटों से बसपा के योगेश वर्मा से जीते थे। सपा के प्रभुदयाल वाल्मीकि भी अच्छा लड़े थे। इस बार भी दिनेश खटीक का मुकाबला योगेश वर्मा से ही बताया जा रहा है, लेकिन योगेश वर्मा बसपा के बजाय सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी हैं।
प्रत्याशी पार्टी मत
दिनेश खटीक भाजपा 99436
योगेश वर्मा बसपा 63329
प्रभुदयाल वाल्मीकि सपा 48951
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बसपा का दावा : हाथी बिगाड़ेगा सबकी चाल, मार लेगा मैदान
मतदान के बाद भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के नेता बसपा के परंपरागत दलित वोट में सेंध लगाने का दावा कर रहे हैं। इसका राज तो ईवीएम में कैद है, लेकिन इससे पहले ही बसपा के नेता विपक्षी दलों के दावों को खारिज कर रहे हैं। बसपा नेताओं का दावा है कि हाथी सबकी चाल बिगाड़ेगा।
बसपा नेताओं का दावा है कि मेरठ कैंट, दक्षिण, सिवालखास, हस्तिनापुर, सरधना, किठौर उनके लिए बेहद मजबूत सीट है। बसपा नेताओं को अपनी पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग पर पूरा भरोसा है। बसपा के मंडल कोऑर्डिनेटर सतपाल पेपला का कहना है कि किठौर, सरधना, सिवालखास, मेरठ दक्षिण, सरधना, कैंट और हस्तिनापुर में बसपा का बेस वोट बैंक 50 से 72 हजार है। किसी भी सीट पर दलित वोट बैंक में बंटवारा नहीं हुआ है, बाकी सभी जातियों में बंटवारा है। जिलाध्यक्ष मोहित जाटव का दावा है कि दलित बसपा मुखिया पर ही भरोसा करता है। दलित समाज विपक्षियों की अफवाहों पर ध्यान नहीं देता है। मतगणना के बाद सभी विपक्षी दलों की पोल खुल जाएगी।
बसपा जिलाध्यक्ष का दावा
किठौर : 65 हजार दलित और 42 हजार गुर्जर एकजुट। गुर्जरों में कोई टूट नहीं। मुस्लिमों ने भी वोट दिया है।
सिवालखास : 65 हजार दलित और एक लाख पांच हजार मुस्लिमों के समीकरण पर चुनाव लड़ा। दलितों में बिखराव नहीं।
सरधना : 72 हजार दलित और 26 हजार जाट वोट में कोई सेंध नहीं। मुस्लिम वोट भी मिला है।
मेरठ कैंट : 72 हजार दलित और 42 हजार ब्राह्मण का समीकरण।
मेरठ दक्षिण : 85 हजार दलित, एक लाख 70 हजार मुस्लिम का समीकरण। वोट बैंक में कोई टूट।
मेरठ शहर : 22 हजार दलित, एक लाख 60 हजार मुस्लिम वोटर एकजुट हुए हैं।
हस्तिनापुर : सपा और भाजपा के प्रत्याशी को दलितों कोई मत नहीं मिला है।
मतदान के बाद भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के नेता बसपा के परंपरागत दलित वोट में सेंध लगाने का दावा कर रहे हैं। इसका राज तो ईवीएम में कैद है, लेकिन इससे पहले ही बसपा के नेता विपक्षी दलों के दावों को खारिज कर रहे हैं। बसपा नेताओं का दावा है कि हाथी सबकी चाल बिगाड़ेगा।
बसपा नेताओं का दावा है कि मेरठ कैंट, दक्षिण, सिवालखास, हस्तिनापुर, सरधना, किठौर उनके लिए बेहद मजबूत सीट है। बसपा नेताओं को अपनी पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग पर पूरा भरोसा है। बसपा के मंडल कोऑर्डिनेटर सतपाल पेपला का कहना है कि किठौर, सरधना, सिवालखास, मेरठ दक्षिण, सरधना, कैंट और हस्तिनापुर में बसपा का बेस वोट बैंक 50 से 72 हजार है। किसी भी सीट पर दलित वोट बैंक में बंटवारा नहीं हुआ है, बाकी सभी जातियों में बंटवारा है। जिलाध्यक्ष मोहित जाटव का दावा है कि दलित बसपा मुखिया पर ही भरोसा करता है। दलित समाज विपक्षियों की अफवाहों पर ध्यान नहीं देता है। मतगणना के बाद सभी विपक्षी दलों की पोल खुल जाएगी।
स्ट्रांग रूम के निरीक्षण की रोज देनी होगी रिपोर्ट
इस बार मेरठ जनपद में सात विधानसभा की वोटों की गिनती करने के लिए दो मतगणना केंद्र बनाए गए हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि में हस्तिनापुर, सरधना और सिवालखास विधानसभा की गिनती होगी तो वहीं हापुड़ रोड स्थित लोहियानगर मंडी में मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण और किठौर विधानसभा की मतगणना कराई जाएगी। यहां बनाए गए स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए जहां अर्द्धसैनिक बल तैनात किया गया है। अधिकारियों की भी एक कमेटी गठित कर सुरक्षा के साथ ही मतगणना तक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा एडीएम सिटी और एडीएम एलए को रोजाना निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एडीएम सिटी दिवाकर सिंह को लोहियानगर मंडी का रोजाना निरीक्षण करेंगे। एडीएम एलए सुल्तान अशरफ सिद्दीकी को कृषि विवि में व्यवस्था देखनी है। जिलाधिकारी के. बालाजी ने बताया कि स्ट्रांग रूम की चाकचौबंद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सियासी दलों के नेता भी अपनी संतुष्टि के लिए पहुंच रहे हैं।
पिछले चुनाव में 65 फीसदी प्रत्याशियों से आगे रहा था नोटा
पिछली बार 2017 के विधानसभा चुनाव में नोटा को जितने वोट मिले उतने 65 फीसदी प्रत्याशी भी नहीं पा सके। जिले की सातों विधानसभा सीटों पर 7658 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। देखना है कि इस बार कितने लोगों ने प्रत्याशियों को खारिज कर नोटा को चुना।
27 सितंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटा लागू करने के आदेश दिए थे। नोटा का मतलब है कि आप किसी भी प्रत्याशी को पसंद नहीं करते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो जिले में सबसे ज्यादा नोटा पर बटन दक्षिण विधानसभा सीट पर दबाया गया। यहां पर 1401 लोगों ने नोटा को पसंद किया। किठौर में 1224 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
कैंट विधानसभा सीट पर 1110 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। सरधना में 1087, सिवालखास में 1086 और हस्तिनापुर में 1013 लोगों ने सारे प्रत्याशियों को खारिज करते हुए नोटा का बटन दबाया।
शहर सीट पर सबसे कम 737 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। छह विधानसभा सीटों पर नोटा को पांचवें नंबर पर और एक पर छठे नंबर पर वोट मिले। कैंट में 15 में से दस, शहर में 16 में से 11, दक्षिण में 12 में से सात प्रत्याशियों को नोटा से कम वोट मिले।
सरधना में 11 में से छह, सिवालखास सीट पर दस में पांच प्रत्याशियों को नोटा से से कम वोट मिले। हस्तिनापुर में सात में से एक, किठौर में आठ में से तीन प्रत्याशियों को नोटा से कम वोट मिले थे।
प्रमुख पार्टियों को छोड़ अधिकतर की हुई थी जमानत जब्त
इस बार सातों विधानसभा सीटों पर 80 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। एकतरफ जहां हर पार्टी और प्रत्याशी बड़ी संख्या में वोट पाने के दावे कर रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो प्रमुख पार्टियों को प्रत्याशियों को छोड़कर अधिकतर की जमानत जब्त ही हुई। पिछली बार सभी दलों और निर्दलीय को मिलाकर 79 प्रत्याशी मैदान में थे। हर विधानसभा क्षेत्र में इन प्रत्याशियों को कुल वोटों के छठे भाग वोट भी नहीं मिल पाए। 65 फीसदी प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाए।