पांच साल की उम्र से शुरू किया था गाना
पद्मश्री से सम्मानित स्वर साधिका और मशहूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने भोजपुरी, अवधी और बुंदेली भाषाओं में रचे गीतों को अपनी मीठी आवाज दी है। उत्तर प्रदेश के कई अंचलों में सावन में 'कजरी' गायी जाती है, मालिनी ने इन आंचलिक गीतों की परंपरा को नई ऊंचाईयां दी। ठुमरी पर भी खूब स्वर साधा। वह बताती हैं कि पांच साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था ।
देश-विदेशों में बनाई पहचान
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में पैदा हुईं मालिनी बचपन से ही गुनगनाने लगी थीं, यही बचपन की मीठी तानें जब भातखण्डे संगीत संस्थान, लखनऊ से प्रशिक्षित होकर निकलीं तो देश की आवाज बन गईं। बता दें कि उन्होंने कई फिल्मों में भी गाने गाए हैं, जिसमें एजेंट विनोद, लिपस्टिक अंडर माय बुर्का, दम लगा के हईशा आदि शामिल हैं। वह बनारस घराने की पद्म विभूषण विदुषी गिरिजा देवी, पौराणिक हिंदुस्तान शास्त्रीय गायिका की शिष्या हैं।