कोई मेरी बहन को बचा लो...
सविता और चंद्रप्रकाश जब वैन में आग से घिरे थे, तब बुरी तरह झुलसे लोगों में शामिल ड्राइवर अवधेश चिला रहा था, कोई मेरी बहन को बचा लो। सविता अवधेश की बहन थी। वह खुद झुलसा हुआ था, लेकिन बहन को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली।
अस्पताल में भर्ती
-अवधेश पुत्र जगन्नाथ प्रसाद निवासी मकान नंबर 32, ओ ब्लॉक, दुर्गा कॉलोनी, रुड़की, हरिद्वार
-अनुज पुत्र पप्पू सिंह, अमेठी, औरंगाबाद, हरिद्वार
-निशा पुत्री पप्पू सिंह, अमेठी, औरंगाबाद, हरिद्वार
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ताक पर कानून : एक्सप्रेसवे पर दौड़ रहे प्रतिबंधित वाहन
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर दोपहिया चलने पर पाबंदी है। इसके बावजूद नियमों का ताक पर रखकर टोल प्लाजा से बिना किसी रोक टोक के एक्सप्रेस वे पर प्रवेश कर रहे हैं और हादसों का कारण बन रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए एनएचएआई और ट्रैफिक पुलिस एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इनकी लापरवाही के कारण दोपहिया वाहन दो लोगों के लिए काल बन गया जो हादसे में जिंदा जल गए।
एक्सप्रेस वे पर नूरपुर रेस्ट एरिया के पास हुए हादसे की जानकारी देते हुए कार सवार शिवम ने बताया कि उनकी कार के आगे एक स्कूटी चल रही थी। स्क्ूटी को बचाने के लिए अवधेश ने वैन का स्टेयरिंग हल्का सा घुमाया तो कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराकर पलट गई। अवधेश कूद गए लेकिन वैन में अचानक आग लग गई। दोपहिया वाहन काल बन गया और दो लोगों की मौत हो गई।
एनएचएआई की जिम्मेदारी
गाजियाबाद के एसपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाहा का कहना है कि दोपहिया वाहनों का प्रवेश रोकने की जिम्मेदारी एनएचएआई की है। जिन्हें साइन बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक करना है। वहीं टोल पर एनएचएआई के बाउंसर व अन्य सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहते हैं। इसके अलावा लगातार अभियान चलाकर एक्सप्रेस वे पर चलने वाले दोपहिया वाहन और उल्टी दिशा में चलने वाले वाहनों के चालान काटे जा रहे हैं।