बीएड के फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर एक अध्यापक नौ साल नौकरी करता रहा, तो दूसरा चार साल से नौकरी कर रहा था। कोर्ट के आदेश पर प्रमाणपत्रों की जांच हुई, तो पोल खुल गई। फर्जी प्रमाणपत्रों पर नौकरी पाने वाले दोनों शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रामेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सचिन कुमार की नियुक्ति सहायक अध्यापक के तौर पर 2015 में प्राथमिक विद्यालय सोना अर्जुनपुर में हुई थी। वर्तमान में वह अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय अंबोली रामपुर मनिहारान में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।
अपर पुलिस महानिदेशक विशेष अनुसंधान दल उत्तर प्रदेश द्वारा कोर्ट के आदेश पर जांच की गई। जिसमें पाया गया कि वर्ष 2004-05 में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से जारी की गई बीएड की टेंपर्ड अंकतालिका में सचिन कुमार को अधिक अंक दिए गए हैं। उच्चाधिकारियों के आदेशों के अनुपालन में सचिन कुमार को बर्खास्त किया गया है।