राजभवन में सभी विवि को दिए निर्देश, एक समान ही तय होगी गाइडलाइन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। कैंपस व सीसीएसयू से संबद्ध कॉलेजों में मूल्यांकन को चुनौती के मामले में राजभवन ने प्रदेश के सभी विवि को एक समान नियम लागू करने का आदेश दिया है। अभी तक अलग-अलग विवि में मूल्यांकन को चुनौती देने के मामले में अलग-अलग फीस निर्धारित थी। अब सभी विवि को इसे एकसमान करने को कहा गया है। अगर किसी शिक्षक की लगातार मूल्यांकन में लापरवाही मिलती है तो उसे मिलने वाला मूल्यांकन पारिश्रमिक रोकने व उसे डिबार करने का आदेश भी दिया है।
राजभवन के इस आदेश से मूल्यांकन की गुणवत्ता सुधरेगी। साथ ही विद्यार्थियों को उनकी क्षमतानुसार अंक मिलेंगे। राजभवन से मिले इस आदेश के बाद सीसीएसयू ने फिलहाल मूल्यांकन को चुनौती के ऑनलाइन, ऑफलाइन दोनों ही प्रकार के आवेदनों को रोक दिया है। सीसीएसयू से संबंद्ध डिग्री कॉलेजों में लगभग छह लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। हर साल परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद नंबर कम आने पर मूल्यांकन को चुनौती देते थे। अभी तक नंबरों से असंतुष्ट छात्र मूल्यांकन को चुनौती देने के लिए 3500 रुपये शुल्क भुगतान करते थे।
प्रक्रिया में अब ये होंगे नए बदलाव
मूल्यांकन को चुनौती के लिए आवेदन अब दो चरणों में होगा। मूल्यांकन को चुनौती देने के लिए अब रिजल्ट आने के 30 दिनों के अंदर छात्र-छात्राओं को चुनौती आवेदन के प्रथम चरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसका शुल्क 300 रुपये प्रति विषय ऑनलाइन ही जमा करना होगा। आवेदन के बाद छात्र को मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देेखने के लिए ऑनलाइन दी जाएगी। उत्तर पुस्तिका देखने के बाद भी छात्र असंतुष्ट होंगे तो दूसरे चरण के लिए आवेदन करना होगा। चुनौती मूल्यांकन के दूसरे चरण का आवेदन रिजल्ट आने के 45 दिनों में ऑनलाइन ही करना होगा।
इस प्रकार होगी मूल्यांकन प्रक्रिया
चुनौती मूल्यांकन की प्रक्रिया के दूसरे चरण के लिए कम से कम चार विषय विशेषज्ञों व परीक्षकों की एक पैनल परीक्षा नियंत्रक द्वारा बनाकर कुलपति को दी जाएगी। जिस विषय का मूल्यांकन होगा उसके लिए उसी विषय के दो विशेषज्ञ से मूल्यांकन कराया जाएगा। इन विषय विशेषज्ञों को तय करने का अधिकार विवि के वीसी व गठित समिति को होगा। जब कॉपी चुनौती मूल्यांकन के लिए जाएगी तो उसके पहले अंकों को छिपा दिया जाएगा। उस कॉपी की दो फोटो कॉपी बनेंगी जो विषय विशेषज्ञों को दी जाएंगी।
बीस फीसदी से अधिक अंतर तो पैसे वापस
दोनों विषय विशेषज्ञों से मिले अंकों का औसत निकाला जाएगा। यह औसत ही अंतिम रूप से मान्य होगा और यही अंक छात्र को मिलेंगे चाहें वे पहले मिले अंकों से कम या ज्यादा कुछ भी हों। अगर औसत अंक और पहले मिले अंकों में बीस प्रतिशत से अधिक का अंतर आया तो छात्र द्वारा जमा किए गए 2500 रुपये में से एक हजार रुपये काटकर शेष पैसे उसे वापस किए जाएंगे।
शिक्षक के खिलाफ ठोस कार्रवाई
चुनौती मूल्यांकन में अगर पिछले अंकों से 20 प्रतिशत से अधिक का अंतर आया तो मूल्यांकन करने वाले शिक्षक को पहले नोटिस भेजा जाएगा। यदि तीन से अधिक मामले एक ही पेपर में आए तो उस शिक्षक को संबंधित पेपर के मूल्यांकन का पूरा पारिश्रमिक रोक दिया जाएगा। अगर ऐसे परीक्षक के पांच से अधिक प्रकरण एक ही पेपर में उसी परीक्षा में मिले तो उसे कम से कम दो साल की अवधि के लिए परीक्षा संबंधी कार्यों से डिबार किया जाएगा। अगर दस से अधिक मामले एक ही पेपर में उसी परीक्षा में आते हैं तो उस परीक्षक की निजी विवरण पुस्तिका में प्रतिकूल टिप्पणी भी की जाएगी।