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मेडिकल कॉलेज का हाल, कोविड भवन में निरीक्षण कर रहे थे प्रमुख सचिव, बाहर घूमता रहा कोरोना पॉजिटिव

Sat, 21 Nov 2020 02:30 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेडिकल कॉलेज में घूमता कोरोना पॉजिटिव - फोटो : अमर उजाला
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प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य आलोक कुमार शुक्रवार दोपहर जिस समय मेडिकल कॉलेज के कोविड भवन का जिलाधिकारी और मेडिकल प्राचार्य के साथ निरीक्षण कर रहे थे। उस समय मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में भर्ती 28 वर्षीय कोरोना पॉजिटिव वार्ड से बाहर निकल आया। कोरोना मरीज हाथ में मोबाइल लेकर लगातार वीडियो दिखाकर मेडिकल कॉलेज की अव्यवस्थाओं की पोल खोलता रहा। कोरोना मरीज के इस तरीके से घूमने पर मेडिकल कॉलेज व जिला प्रशासन के अफसरों में हड़कंप मच गया। पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं डीएम के बालाजी ने भी पर संज्ञान लेते हुए जांच बैठा दी है।

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कोरोना का यह मरीज 28 वर्षीय है। जो बेगमपुल के पास का रहने वाला है। युवक व उसके पिता 18 नवंबर को कोरोना पॉजिटिव मिले। जिसके बाद मेडिकल कॉलेज के सीटू वार्ड जनरल में आइसोलेट कराया गया। युवक ने एक वीडियो वायरल करते हुए आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में गंदगी का ढेर लगा है। कोरोना का कोई इलाज नहीं कर रहे हैं। नर्स व छोटे कर्मचारी ही दिन में एक या दो बार खानापूर्ति के लिए मरीज का हाल चाल पूछने जा रहे हैं। मरीज के परिवार वाले जो खाना पहुंचाते हैं वह भी समय से नहीं पहुंच रहा है। वहीं एक मरीज जिसे हाथ पैर बांधकर कोविड वार्ड में रखा गया है। वहां गंदगी थी लेकिन कहने के बाद भी सफाई नहीं की।

मरीज ने कहा कि मेरे पिता की शुक्रवार सुबह मेडिकल की कोविड वार्ड में ही मौत हो गई। डॉक्टरों की लापरवाही से उनकी मौत हुई है। मैंने अंतिम संस्कार के लिए मेडिकल कॉलेज से परमिशन ली। युवक ने यह भी कहा कि मेरे पिता का बेड कुछ दूरी पर था। सुबह मुझे किसी ने बताया नहीं। मैंने एक सफाई कर्मचारी को 100 रुपये दिए, जिसके बाद कर्मचारी ने कहा कि तुम्हारे पिता की मौत हो गई है। मेडिकल कॉलेज के कोविड के बाहर जहां प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, जिला अधिकारी, सीएमओ व अन्य अधिकारियों की गाड़ियां खड़ी थी वहां भी यह युवक मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों, गार्डों और अन्य लोगों से बातचीत करता रहा। जिसकी लोगों ने वीडियो भी बनाई। गार्ड व डॉक्टर के समझाने पर भी यह नहीं माना। युवक ने कहा कि मैं पॉजिटिव हूं। लेकिन प्रमुख सचिव को मैं यहां की वीडियो के माध्यम से सच दिखाना चाहता हूं कि यह किस तरीके का इलाज हो रहा है और कैसे अंदर गंदगी है। इस दौरान युवक ने निर्धारित दूरी बनाते हुए मीडिया कर्मियों से बात करते हुए वीडियो बनाई। वीडियो में प्रमुख सचिव की गाड़ी भी नजर आ रही है।
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सिस्टर इंचार्ज को हटाया, मांगा स्पष्टीकरण
इस संबंध में मेडिकल के प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि कोरोना मरीज के लापरवाही बरतने के मामले में सिस्टर इंचार्ज को हटाया गया है। डॉ. धीरज को चेतावनी दी गई है। डॉ. सुमित से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

कोरोना मरीजों के परिजनों ने प्रमुख सचिव को रोका
मेडिकल कॉलेज में कोरोना की समीक्षा बैठक व निरीक्षण के बाद जब प्रमुख सचिव आलोक कुमार निकले तो मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोरोना मरीजों के परिजनों ने उन्हें रोक लिया। कहा कि यहां हमारे मरीज हैं और उनकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। जिससे हमें परेशानी का सामना उठाना पड़ रहा है। ब्रह्मपुरी निवासी 50 वर्षीय व्यक्ति कोरोना के चलते मेडिकल में भर्ती है। उसकी पत्नी व बेटा प्रमुख सचिव के सामने बिलख पड़े। कहा कि 17 नवंबर के बाद उन्हें कोई जानकारी नहीं दी कि मरीज की हालत कैसी है। जिस पर मेडिकल प्राचार्य ने कहा कि परिजनों के आरोप गलत हैं। सभी कुछ नियमानुसार हो रहा है।

वहीं, माधवपुरम निवासी प्रदीप गर्ग ने प्रमुख सचिव से कहा कि उनके पिता की कोरोना से मौत हो चुकी है। एक निजी अस्पताल से कराई जांच और सरकारी अस्पताल से कराई रिपोर्ट में अंतर आया है। जिस पर प्रमुख सचिव ने सीएमओ को जांच के निर्देश दिए।

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