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अच्छे कर्मों से प्रशस्त होता है मोक्ष मार्ग : आचार्य सौरभ

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सिद्ध चक्र महामंडल विधान के सातवें दिन जैन संत ने दिया धर्मलाभ
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शांतिधारा के बाद हुआ चित्र अनावरण
संगीतकार पारस जैन ने किया मंत्रमुग्ध
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आचार्य सौरभ सागर के सानिध्य में जैन बोर्डिंग हाउस में सिद्ध चक्र महामंडल विधान के सातवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा की। जैन आचार्य सौरभ सागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है। अच्छे कर्म मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
जैन संत ने कहा कि प्रभु नाम से जुड़ने और भक्ति समर्पण करने से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। जब संसार के विषय भोगों में सुख के स्थान पर दुख दिखाई देने लगे तो समझना चाहिए कि कल्याण का मार्ग निकट है। सिद्ध चक्र महामंडल विधान दुखों को दूर करने और जीवन में सुख समृद्धि की भावना को मजबूत करने वाला है। उन्होंने महासती मैना सुंदरी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अत्यंत भक्ति भाव से विधान कर अपने पति श्रीपाल सहित 700 साथियों के कुष्ठ रोग को दूर किया था।
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इससे पूर्व सुबह के समय भगवान की शांतिधारा का सौभाग्य अमित जैन सुशांत सिटी परिवार को मिला। चित्र अनावरण अनूप जैन ( शुक्र इंद्र ) एवं राजकुमार जैन ( महाशुक्र इंद्र ) परिवार ने किया। दीप प्रज्ज्वलन किशन जैन परिवार द्वारा किया गया। विकास जैन सीए नेहरू रोड परिवार को जीवन आशा हॉस्पिटल का आजीवन सदस्य बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
पंडित संदीप जैन शास्त्री सजल संगीतकार पारस जैन की सुमधुर भक्ति लहरियों के बीच करीब 800 विधानार्थियों ने जिनेंद्र भगवान की पूजन, वंदन और विधान किया। सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि 11 अगस्त को श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का समापन होगा। कार्यक्रम में प्रेम चंद जैन, सुरेंद्र कुमार जैन, संजय जैन, रितेश जैन, वीरेंद्र जैन, रामेंद्र जैन, अनिल जैन, विनोद जैन, योगेश जैन रहे।
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सती चंदनबाला नाटिका का मंचन किया

मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष एवं श्री पुष्प वर्षा योग समिति के चेयरमैन सुरेश जैन रितुराज ने विधान में शामिल श्रद्धालुओं के लिए लकी ड्रॉ कराया। विजेताओं को मनोज जैन ने उपहार दिए। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मुक्ताकाश नाट्य संस्था द्वारा सुरेश जैन द्वारा रचित सती चंदनबाला नाटिका का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान महावीर के आहार और चंदनबाला की अथाह भक्ति को केंद्र में रखकर प्रस्तुत की गई नाटिका ने धर्मानुरागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


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