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दारुल उलूम देवबंद का नया फतवा: औरतों का मस्जिद में तरावीह की नमाज पढ़ना गलत

Mon, 20 May 2019 10:17 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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देवबंद
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दारुल उलूम के एक फतवे में औरतों के रमजान माह की विशेष नमाज तरावीह की जमात करने और मस्जिद में तरावीह की नमाज पढ़ने को गलत करार दिया गया है। मुफ्तियों ने तर्क दिया कि फर्ज नमाज के लिए औरतों को मस्जिद में जाने की इजाजत नहीं तो तरावीह के लिए उन्हें कैसे इजाजत हो सकती है। 

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पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से एक व्यक्ति ने दारुल उलूम के मुफ्तियों से लिखित में सवाल किया था कि विभिन्न स्थानों पर अलग- अलग तरीकों से औरतों की तरावीह की नमाज हो रही है। एक स्थान पर हाफिज को इमाम बनाकर औरतें नमाज-ए-तरावीह पढ़ रही हैं, जबकि दूसरी जगह नाबालिग (कम उम्र) को इमाम बनाकर तरावीह अदा की जा रही है। कुछ स्थानों पर मस्जिदों में औरतों के लिए तरावीह का इंतजाम हो रहा है। इतना ही नहीं कई जगह ऐसी है जहां घर के अंदर हाफिज साहब तरावीह पढ़ा रहे हैं, जिनके पीछे मर्द नमाज अदा कर रहे हैं, जबकि उसी घर के दूसरे कमरे में पर्दे के साथ महिलाएं तरावीह पढ़ रही हैं। पूछा गया कि इनमें से किस तरीके से महिलाओं का तरावीह की नमाज पढ़ना सही है। सवालों के जवाब में मुफ्तियों ने कहा कि महिलाओं को तरावीह की नमाज घर के भीतर एकांत में अदा करनी चाहिए। क्योंकि महिलाओं को फर्ज नमाजों के लिए भी मस्जिदों में जाने की इजाजत नहीं है। नाबालिग की इमामत दुरुस्त नहीं और न ही उसके पीछे नमाज होगी। 

इसके अलावा औरतों की तरावीह की नमाज अदा करने के लिए पूछे गए सभी तरीके बिल्कुल मना है। सिर्फ घर के भीतर एकांत में तरावीह की नमाज अदा करने की इजाजत है। देवबंद दारुल उलूम से जारी फतवा सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल हो रहा है।
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