माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आनंदपुरी में आचार्य विमर्श सागर ने कहा कि आत्मा का स्वरूप शुद्ध, सिद्ध और चैतन्य है। उन्होंने ज्ञान, दर्शन और चरित्र को सम्यक दर्शन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह धर्म का बीज है।
आचार्य ने कहा कि वस्तु अनंत गुणों वाली होती है। उसे विभिन्न दृष्टियों से समझना ही सही दृष्टिकोण है। उन्होंने व्यवहार और निश्चय धर्म में संतुलन रखने का संदेश दिया। प्रवचन के अंत में उन्होंने कहा कि जीवन पानी की बूंद के समान है। कार्यक्रम में 35 साधु-साध्वी मंच पर विराजमान रहे। इस अवसर पर आचार्य का आहार श्रावक राजीव जैन के यहां हुआ। कार्यक्रम में पंकज, अचल, अंकित, राजकुमार, प्रमोद, प्रवीण, अनिल चेतन सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।